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नैटो की जगह यूरोपीय संघ के सैनिक | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सैनिक बैंड की धुन के साथ शुरू हुए औपचारिक समारोह में यूरोपीय संघ ने अब तक अपने सबसे बड़े शांतिरक्षक अभियान की ज़िम्मेदारी संभाल ली. बॉस्निया में हुआ संघर्ष दूसरे विश्व युद्ध के बाद यूरोप में हुए संघर्षों में सबसे बड़ा माना जाता है. ये संघर्ष 1995 में समाप्त तो हो गया लेकिन तबसे ही पश्चिमी देशों के सामरिक गठबंधन नैटो ने वहाँ शांतिरक्षा का काम सँभाला था. अब यह जिम्मेदारी यूरोपीय संघ ने संभाल ली है. यूरोपीय संघ की शांतिरक्षा सेना में तीस से ज़्यादा देशों के सैनिक शामिल होंगे जिनमें कई देश यूरोपीय संघ के बाहर के भी हैं. यूरोपीय संघ के शांतिरक्षा अभियान के प्रमुख ब्रिटेन के मेजर जनरल डेविड लीकी ने कहा कि वो नैटो के काम को ही आगे बढ़ाते हुए इलाक़े में शांति का माहौल बनाए रखने का काम जारी रखेंगे. उन्होंने कहा “ये एक ऐतिहासिक मौका है. बॉस्निया और हर्त्स्गोविना के विकास में ये एक मील का पत्थर होगा और ये इस बात का भी सबूत है कि किस तरह नैटो और यूरोपीय संघ आपसी सहयोग बढ़ा रहे हैं.” नैटो महासचिव जाप द हूप शैफ़र का इशारा इस ओर था कि बॉस्निया में भले ही काम यूरोपीय संघ संभाल रहा हो, लेकिन सारायेवो में नेटो का एक सैनिक मुख्यालय क़ायम रहेगा और वो वहाँ जारी आतंकवाद विरोधी अभियान और रक्षा सुधार संबंधी काम जारी रखेंगे. लेकिन बीबीसी के कूटनीतिक मामलों के संवाददाता जोनाथन मार्कस का कहना है कि ये यूरोपीय संघ के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है. यूरोपीय संघ लंबे समय से कहता रहा था कि बॉस्निया का मसला एक यूरोपीय मसला है और इसीलिए वहाँ शांतिरक्षा का काम भी यूरोपीय संघ को संभालना चाहिए जो वो अब करने जा रहा है. |
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