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रफ़रां की छुट्टी, विलपां प्रधानमंत्री बने | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
यूरोपीय संविधान को जनमत संग्रह में स्वीकृति नहीं मिल पाने के बाद फ़्रांस के प्रधानमंत्री ज़ां पिए रफ़रां ने इस्तीफ़ा दे दिया है. राष्ट्रपति ज़ाक़ शिराक ने उनका इस्तीफ़ा स्वीकार कर लिया है. गृहमंत्री का पद संभालनेवाले डोमिनिक़-ड-विलपां को देश का नया प्रधानमंत्री बनाए जाने की घोषणा की गई है. रविवार को फ़्रांस में हुए जनमत संग्रह में 55 प्रतिशत मतदाताओं ने संविधान के विरोध में मत डाले थे. इसके बाद फ़्रांस में सरकार के सामने संकट खड़ा हो गया और कहा जा रहा था कि राष्ट्रपति शिराक़ अपनी कैबिनेट में उलटफेर करनेवाले हैं. ये भी पहले से ही समझा जा रहा था कि वहाँ अलोकप्रिय प्रधानमंत्री ज़ां पिए रफ़रां को अपनी कुर्सी गँवानी पड़ सकती है. नीदरलैंड यूरोपीय संघ के प्रस्तावित संविधान पर नीदरलैंड में बुधवार को जनमत संग्रह होना है और ताज़ा सर्वेक्षणों के अनुसार वहाँ इसका फ़्रांस से भी अधिक विरोध हो सकता है. सर्वेक्षणों के अनुसार नीदरलैंड में लगभग 60 प्रतिशत मतदाता संविधान के विरोध में मत डाल सकते हैं. नीदरलैंड में बुधवार को पिछले 200 वर्षों में पहली बार कोई राष्ट्रीय जनमत संग्रह होगा. नीदरलैंड के प्रधानमंत्री यान पेटर बल्केनेन्ड ने अपने देशवासियों से अनुरोध किया है कि वे बिना फ़्रांस के जनमत संग्रह से प्रभावित हुए मतदान करें. उन्होंने कहा,"डच लोगों को केवल फ़्रांस का अनुसरण नहीं करना चाहिए बल्कि अपना फ़ैसला स्वयं करना चाहिए". मगर बीबीसी के हेग संवाददाता का कहना है कि नीदरलैंड में आम लोग एकीकृत मुद्रा यूरो के आने के बाद से महँगाई बढ़ने और देश की सरकार से नाराज़ हैं. वहाँ कई मतदाता यूरोपीय संघ के विस्तार से ख़ुश नहीं हैं और तुर्की को सदस्यता दिए जाने की योजना का विरोध कर रहे हैं. समझा जाता है कि फ़्रांस में हुए जनमत संग्रह में भी मतदाताओं को तुर्की की सदस्यता के मुद्दे ने काफ़ी प्रभावित किया था. |
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