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शुक्रवार, 24 जून, 2005 को 23:22 GMT तक के समाचार
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ईरान के राष्ट्रपति चुनाव में अहमदीनेजाद 'विजयी'
रफसंजानी और अहमदीनेजाद
रफसंजानी (बाएँ) को काफ़ी अंतर से पीछे छोड़ा अहमदीनेजाद ने
ईरान में रूढ़िवादी नेता और तेहरान के मेयर महमूद अहमदीनेजाद ने राष्ट्रपति चुनाव में स्पष्ट जीत हासिल कर ली है.

ईरानी अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी अकबर हाशमी रफसंजानी को काफ़ी पीछे छोड़ दिया है.

ईरानी समाचार एजेंसी का कहना है कि अहमदीनेजाद को साठ प्रतिशत से अधिक वोट मिले हैं, हाशमी रफसंजानी के कुछ सहयोगियों ने माना है कि उनके उम्मीदवार की हार हुई है.

दूसरे दौर में सिर्फ़ 47 प्रतिशत लोगों ने वोट डाला जबकि पहले दौर में भारी मतदान हुआ था.

इससे पहले रफसंजानी के समर्थकों का कहना था कि अगर अहमदीनेजाद जीतते हैं तो इससे यह साबित हो जाएगा कि चुनाव में धांधली हुई है.

पहले दौर के मतदान के बाद उदारवादी उम्मीदवारों ने ईरान रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स और ख़ुफ़िया सेवा पर आरोप लगाया था कि वह अहमदीनेजाद को जिताने की कोशिश कर रही है.

तनाव

मतदान ख़त्म होने के वक़्त तक मतदान केंद्रों पर लोगों की भारी भीड़ जमा थी, कई लोगों ने आरोप लगाए कि ग़लत तरीक़े से मतदान कराया जा रहा है और कुछ लोगों ने वहाँ अनधिकृत लोगों की मौजूदगी की शिकायत की.

वोटों की गिनती
वोटों की गिनती परंपरागत तरीक़े से हो रही है

समचार एजेंसी एपी के अनुसार सिर्फ़ तेहरान शहर में ही गड़बड़ियों की 300 से अधिक शिकायतें मिली हैं.

ईरान में चुनाव देश के भविष्य के सवाल पर लड़ा जा रहा है, रूढ़िवादी और उदारवादी, दोनों ख़ेमे दावा कर रहे हैं कि जीत उनकी होगी.

वोटों की गिनती का काम हाथ से किया जा रहा है और संभावना बताई जा रही है कि परिणाम शनिवार तक सामने आ जाएँगे.

तेहरान से बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इस बार के चुनाव में भारी संख्या में लोगों के मतदान करने से ज़ाहिर होता है कि जनता ने इस चुनाव की अहमियत को समझा है.

आमने-सामने

चुनाव से पहले तक माना जा रहा था कि रफसंजानी की जीत की संभावना सबसे अधिक है क्योंकि वे उदारवादी छवि वाले नेता हैं और अमरीका से संबंधों में सुधार के हामी हैं जबकि अहमदीनेजाद को रूढ़िवादी माना जाता है और उनकी जीत की भविष्यवाणी कम ही लोग कर रहे थे.

ईरानी सेना में अधिकारी रह चुके अहमदीनेजाद को धार्मिक नेताओं का पसंदीदा उम्मीदवार माना जाता है, अहमदीनेजाद ने ईरानी जनता से वादा किया है कि वे इस्लामी क्रांति को क़ायम रखेंगे.

दोनों उम्मीदवारों के बीच विचारधारा के इस अंतर की वजह से ईरान की जनता के सामने कठिन सवाल उठ खड़े हुए हैं, अब परिणामों से ही पता चलेगा कि उन्होंने किसे चुना है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इन दोनों उम्मीदवारों के बीच के अंतर ने पूरे देश को दो टुकड़ों में बाँट दिया है.

पश्चिमी देशों, ख़ास तौर पर अमरीका की नज़र इस चुनाव के परिणाम पर है क्योंकि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर जारी विवाद की दिशा काफ़ी हद तक चुनाव नतीजों से तय होगी.

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