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मुशर्रफ़ के बयान का बुरा असर नहीं | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने कहा है कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने जम्मू कश्मीर के बारे में जो बात संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाषण के दौरान कही, उससे दोनों देशों के बीच चल रही शांति प्रक्रिया पर कोई असर नहीं पड़ेगा. न्यूयॉर्क में शुक्रवार को पत्रकार सम्मेलन में सवालों के जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि मुशर्रफ़ ने महासभा में जो बात कही उसका लहज़ा और अंदाज़ उससे अलग था जो उन्होंने पिछले साल संयुक्त राष्ट्र महासभा में कही थी. प्रधानमंत्री ने कहा, "अगर हमें अतीत में जाकर सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का ही हवाला देना है तो फिर द्विपक्षीय बातचीत करने का क्या तुक है." ग़ौरतलब है कि परवेज़ मुशर्रफ़ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए भाषण में कहा था कि कश्मीर समस्या का समाधान इस तरह निकाला जाना चाहिए जो पाकिस्तान और भारत के साथ-साथ कश्मीर के लोगों को भी मंज़ूर हो. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ मनमोहन सिंह ने मुशर्रफ़ के साथ अपनी मुलाक़ात के बारे में निराशावादी रुख़ नहीं दिखाया और कहा कि यह मुलाक़ात एक अतिरिक्त मौक़ा था क्योंकि दोनों ही नेता महासभा की बैठक में भाग लेने के लिए आए थे. उन्होंने कहा कि इस तरह की मुलाक़ातों से किसी नाटकीय नतीजे की उम्मीद नहीं की जा सकती लेकिन प्रधानमंत्री ने कहा कि मुशर्रफ़ के साथ मुलाक़ात 'रचनात्मक' रही. उधर राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने भी मनमोहन सिंह से मुलाक़ात को सार्थक बताया. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध समस्याओं से घिरे रहे हैं लेकिन अब दोनों देश विवादों को शांतिपूर्ण तरीक़े से सुलझाने के लिए संकल्पबद्ध हैं. परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा, "हम अमन की तरफ़ बढ़ रहे हैं. नेताओं में लगन और संकल्प है - मेरे अंदर भी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अंदर भी." महासभा परवेज़ मुशर्रफ़ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण में यह भी कहा था कि जम्मू कश्मीर में सीमा पार से आतंकवाद के ख़ात्मे के मुद्दे के साथ-साथ भारत प्रशासित कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन के मुद्दे पर भी बात होनी चाहिए.
इस पर मनमोहन सिंह ने कहा कि वह उस नियंत्रण व्यवस्था से प्रभावित हैं जो परवेज़ मुशर्रफ़ ने सीमा पार से घुसपैठ को रोकने के लिए लागू की है. उन्होंने कहा कि अगर सीमा पार से घुसपैठ और हिंसा में कमी होती है तो कश्मीर में तैनात सैनिकों की संख्या में कमी करने पर विचार किया जा सकता है. मानवाधिकारों के उल्लंघन के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार जम्मू कश्मीर में सभी नागरिकों के सम्मान और मानवाधिकारों की हिफ़ाज़त करने के लिए कटिबद्ध है. उन्होंने कहा कि सरकार उन लोगों के मामलों की पहले से ही समीक्षा कर रही है जो जेल में हैं. प्रधानमंत्री ने कहा, "अगर हालात में कोई ठोस बदलाव होता है, जैसाकि राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने भरोसा दिलाया है, तो बहुत कुछ किया जा सकता है." |
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