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आपसी सहयोग के कई समझौते | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर के बीच आतंकवाद, पर्यावरण से लेकर सामरिक मसलों पर चर्चा हुई और कई क्षेत्रों में अहम समझौते हुए. दोनों प्रधानमंत्रियों की बातचीत के दौरान ऊर्जा, विमान सेवाओं, फ़िल्म निर्माण और बौद्धिक संपदा के क्षेत्र में सहयोग पर समझौते हुए. दोनों प्रधानमंत्रियों ने एक संवाददाता सम्मेलन में संयुक्त रूप से इनकी घोषणा की. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बताया कि ब्रिटेन ने संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया. दोनों ने बातचीत को व्यापक और सकारात्मक बताया और कहा कि ऊर्जा क्षेत्र, दक्षिण एशिया में स्थिरता लाने और आतंकवाद पर दोनों देशों के मत एक से हैं. ब्लेयर और मनमोहन सिंह ने व्यापार और निवेश बढ़ाने, स्वास्थ्य और सेवा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने, विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में रिश्ते मज़बूत करने पर ज़ोर दिया. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि आर्थिक मामलों पर वित्त मंत्री स्तर की बातचीत की जाएगी. साथ ही घोषणा की गई कि भारत और ब्रिटेन असैनिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग करेंगे. बातचीत भारतीय प्रधानमंत्री ने हाल में ब्रिटेन में हुए बम हमलों पर अपनी संवेदना व्यक्त की और कहा कि भारत दो दशकों से आतंकवाद का शिकार रहा है. मनमोहन सिंह का कहना था, ''आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता है और न ही आतंकवादियों का कोई धर्म होता है. वे किसी धर्म के मित्र नहीं हैं.'' ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर का कहना था कि दोनों देशों के बीच बातचीत सकारात्मक रही. दोनों देशों ने ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग पर बल दिया. दोनों प्रधानमंत्रियों ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद से पूरी ताक़त के साथ निबटा जाएगा. टोनी ब्लेयर ने एक सवाल के जवाब में कहा कि 'ब्रिटेन और भारत इस्लाम की ग़लत व्याख्या से प्रभावित हैं. उनका कहना था कि इससे निपटने का तरीक़ा सिर्फ़ सुरक्षा क़दम उठाना नहीं है, हमें इसकी जड़ों से निपटना होगा.' ब्लेयर का कहना था कि आतंकवाद न केवल नैतिक रूप से ग़लत है बल्कि विनाशकारी भी है. व्यापार और निवेश दोनों देशों के रिश्तों का एक अहम हिस्सा व्यापार और निवेश था. भारत ने ब्रिटेन को आश्वस्त किया कि देश की आर्थिक नीतियों को और उदार किया जाएगा. मनमोहन सिंह का कहना था कि आयात-निर्यात शुल्क में ढील दी जाएगी ताकि देश में 10 से 15 अरब डालर विदेशी निवेश को आकर्षित किया जा सके. ब्रिटेन और भारत के बीच प्रति वर्ष दस अरब डॉलर का व्यापार होता है और इसे बढ़ाने पर ज़ोर दिया गया. ब्रिटेन भारत में तीसरा सबसे बड़ा पूँजी निवेश करने वाला देश है. संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में ब्रिटिश प्रधानमंत्री को इराक़, इस्लाम और आतंकवाद पर कई सवालों का सामना करना पड़ा, वहीं भारतीय प्रधानमंत्री से वामदलों के गतिरोध और गठबंधन राजनीति पर सवाल किए गए. टोनी ब्लेयर और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बीच राजस्थान के उदयपुर में बातचीत हुई थी. दोनों नेता उदयपुर में बातचीत के बाद वापस दिल्ली आए जहाँ उन्होंने एक संवाददाता सम्मेलन को संयुक्त रूप से संबोधित किया. प्रेक्षकों का मानना है कि ब्रिटेन में हुए धमाकों के बाद आतंकवाद जैसे मुद्दों पर ब्रिटेन के रुख़ में बदलाव आया है और अब वह भारत की चिंताओं को बेहतर समझ सकता है. |
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