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वार्ता में भाग लेने ब्लेयर दिल्ली पहुँचे | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर अपनी चीन यात्रा के बाद भारत पहुँचे हैं. वे बुधवार को भारत-यूरोपीय संघ वार्ता और फिर भारत ब्रिटेन द्विपक्षीय बातचीत में भाग लेंगे. वे भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भारत-यूरोपीय संघ वार्ता के दौरान बुधवार को मिलेंगे और माना जा रहा है कि व्यापार के मुद्दों पर चर्चा होगी. महत्वपूर्ण है कि इससे पहले चीन में उन्होंने वाणिज्य, मानवाधिकार और लोकतंत्र के मुद्दो पर बात की. भारत-यूरोपीय संघ व्यापार उल्लेखनीय है कि ताज़ा आँकड़ों के अनुसार भारत से यूरोपीय संघ को होने वाला निर्यात हर साल 20 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है और यूरोपीय संघ से भारत में आयात हर साल 15 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है. भारत के कुल निर्यात का 25 प्रतिशत यूरोपीय संघ के देशों को हाता है चाहे भारत-यूरोपीय संघ व्यापार में यूरोपीय संघ के देशों का पलड़ा थोड़ा सा भारी है. बीबीसी संवाददाता निक ब्रायंट का कहना है कि जहाँ कभी भारतीय नेता यूरोपीय की ओर मदद के लिए देखते थे वहीं यूरोप अब भारत के साथ बराबरी का रिश्ता चाहता है और दोनो पक्ष चाहते हैं कि क़रीबी आर्थिक सहयोग से दोनो देशों को फ़ायदा हो. बुधवार को प्रधानमंत्री ब्लेयर यूरोपीय संघ के वर्तमान अध्यक्ष की भूमिका में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिलेंगे और फिर गुरुवार को भारत-ब्रिटेन द्विपक्षीय बातचीत होगी. द्विपक्षीय बातचीत दोनो देशों के बीच एक साल में दस अरब डॉलर का व्यापार होता है. ब्रिटेन भारत में तीसरा सबसे बड़ा पूँजी निवेश करने वाला देश है. निक ब्रायंट के अनुसार प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री ब्लेयर के साथ यूरोपीय किसानों की दी जाने वाली भारी सब्सिडी या रियायतों की बात करेंगे. भारत का मानना है कि इसी वजह से भारत कृषि उत्पाद यूरोपीय बाज़ारों में नहीं बिक पाता. माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री ब्लेयर ग्लोबल वॉर्मिंग यानि पृथ्वी के बढ़ते तापमान से जल-वायु परिवर्तन और इसका सामना करने में विकासशील देशों की भूमिका की बात करेंगे. |
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