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यूरोपीय संघ के साथ सामरिक संधि | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत ने यूरोपीय संघ के साथ एक महत्वपूर्ण सामरिक संधि पर हस्ताक्षर किए हैं. अधिकारियों का कहना है कि इस संधि से दोनों पक्षों के बीच संबंध और मज़बूत होंगे. इस संधि के बाद अमरीका, कनाडा, चीन और रूस की तरह भारत भी यूरोपीय संघ का एक विशेष सहयोगी बन गया है. भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नीदरलैंड में इस समझौते पर दस्तख़त करने के बाद कहा कि वे इसका स्वागत करते हैं. यूरोपीय संघ भारत में विदेशी निवेश करनेवाला एक महत्वपूर्ण समूह है हालाँकि संघ चीन में ज़्यादा निवेश करना चाहता है. महत्वपूर्ण दौरा नीदरलैंड की तीन दिन की यात्रा पर रवाना होने से पहले भारतीय प्रधानमंत्री ने यूरोपीय संघ और भारत को एक स्वाभाविक सहयोगी करार दिया था. भारतीय प्रधानमंत्री अपने दौरे में यूरोपीय नेताओं के साथ जिन मुद्दों पर बात करनेवाले हैं उनमें विश्वव्यापीकरण, आतंकवाद, परमाणु अप्रसार, ऊर्जा और व्यापार संबंधी मुद्दे शामिल हैं. मनमोहन सिंह नीदरलैंड के प्रधानमंत्री के अलावा यूरोपीय संघ के अध्यक्ष रोमानो प्रोदी से भी मुलाक़ात करेंगे. यूरोपीय संघ और भारत यूरोपीय संघ भारत से व्यापार के मामले में अमरीका को ख़ासी टक्कर दे रहा है. वर्ष 2002 में भारत से निर्यात में यूरोपीय संघ की हिस्सेदारी 23 प्रतिशत थी. यूरोपीय अधिकारियों के अनुसार 1992 से 2002 की अवधि में दोनों पक्षों के बीच का व्यापार बढ़कर 33 अरब डॉलर तक पहुँच गया. मगर संवाददाताओं का कहना है कि अभी भी दोनों पक्षों के बीच आपसी व्यापार चीन की तुलना में काफ़ी कम है. उनके अनुसार भारत के साथ यूरोपीय संघ का व्यापार चीन के साथ होनेवाले उसके व्यापार के 20 प्रतिशत हिस्से से भी कम है. |
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