| तेल की क़ीमतें कम नहीं होंगीः मनमोहन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दो ऐसी बातें कही हैं जिसके बारे में राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि वे वामपंथियों को नागवार गुज़र सकती हैं. एक तो यह कि पेट्रोलियम पदार्थों के जो दाम बढ़ाए गए हैं उसे वापस नहीं लिया जाएगा. दूसरा ये कि अमरीका से रिश्तों में दूरी नहीं रखी जा सकती. ये दोनों ही सुझाव संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार को बाहर से समर्थन दे रही वामपंथी पार्टियों ने दिए थे. भारत और यूरोपीय संघ की बैठक में भाग लेने के लिए जाते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने विमान में पत्रकारों से हुई बातचीत में वामपंथी दलों से अनुरोध किया कि वे समझें कि पेट्रोलियम पदार्थों की क़ीमतें बढ़ाना सरकार की मजबूरी है. उनका कहना था कि सरकार के लिए ज़रुरी है कि वह सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को बचाएँ. उनको लाभकारी बताते हुए सिंह ने कहा, “सोने की अंडा देने वाली मुर्गी को नहीं मारा जा सकता.” अमरीका एजेंसियों के अनुसार अमरीका से रिश्तों के सवाल पर मनमोहन सिंह ने कहा कि अमरीका एक महाशक्ति है इसे स्वीकार करना चाहिए. वामदलों की आपत्ति पर प्रधानमंत्री ने कहा कि इस मसले पर कांग्रेस और वामपंथी दलों के बीच कोई वैचारिक मतभेद नहीं हैं, भले ही दोनों की भाषा अलग-अलग हो. एक बहुपक्षीय दुनिया की वकालत करते हुए उन्होंने कहा कि इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि अमरीका आर्थिक रुप से और राजनीतिक दृष्टि से एक महाशक्ति है और भारत को ज़मीनी हक़ीकत को ध्यान में रखना होगा. उन्होंने कहा, "हम एक असंतुलित शक्तियों की दुनिया में रह रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय संबंध वास्तव में शक्तियों से संबंध हैं." उन्होंने कहा कि भारत को अपने हितों की रक्षा के लिए मौजूदा ढाँचे का ही उपयोग करना होगा. हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि भारत और अमरीका के हित कई बार अलग होते हैं. अपने मंत्रिमंडल के विस्तार की ख़बरों को वे टाल गए. |
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