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पेट्रोल-डीज़ल की क़ीमतें बढ़ाने की निंदा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में पेट्रोल, डीज़ल और रसोई गैस की क़ीमतें बढ़ाने के केंद्र सरकार के फैसले की जहां विपक्षी भारतीय जनता पार्टी ने कड़ी आलोचना की है वहीं सरकार के सहयोगी वामपंथी दलों ने भी फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है. दिल्ली में एक बयान जारी कर भारतीय जनता पार्टी ने कहा है कि कांग्रेस ने वामपंथियों के साथ मिलकर आम आदमी को करारी चोट पहुंचाई है. भाजपा का कहना है कि पिछले छह महीनों में चौथी बार पेट्रोल की कीमतें बढ़ाई गई हैं. जिससे आम आदमी की हालत ख़राब हो रही है. रसोई गैस की क़ीमतें बढ़ाए जाने के बारे में पार्टी का कहना था कि यह पहले से ही परेशान आम जनता को धीमा ज़हर देने जैसा है. आलोचना पार्टी का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमतें 13 अक्तूबर से पहले से ही आसमान छू रही थीं लेकिन महाराष्ट्र में चुनावों के कारण दाम नहीं बढ़ाए गए और अब जब दाम घट रहे हैं तो भारत में क़ीमतें बढ़ा दी गई हैं. भाजपा ने इस फ़ैसले के समय की भी आलोचना करते हुए कहा कि केंद्र सरकार सारे फ़ैसले राजनीति से प्रेरित होकर कर रही है. उधर सरकार की महत्वपूर्ण सहयोगी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने भी क़ीमतें बढ़ाने के फ़ैसले पर सवाल उठाए हैं. पार्टी नेता प्रकाश करात ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि तेल डीज़ल और रसोई गैस की क़ीमतें बढ़ाने के फ़ैसले का समय सही नहीं है. उनका कहना था कि इस फ़ैसले से मंहगाई बढ़ेगी और आम आदमी पर और बोझ बढ़ेगा. वामपंथी दलों ने इस फ़ैसले पर पुनर्विचार करने की भी मांग की है. |
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