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पेट्रोल और डीजल की क़ीमतें नहीं बढ़ेंगी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री मणिशंकर अय्यर ने घोषणा की है कि देश में पेट्रोल और डीजल की क़ीमतें नहीं बढ़ाई जाएँगी. अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमतों के रिकॉर्ड स्तर तक पहुँचने के बाद तेल कंपनियों ने सरकार से क़ीमतें बढ़ाने की बात कही थी. पेट्रोलियम मंत्री मणिशंकर अय्यर ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाक़ात की. प्रधानमंत्री से मुलाक़ात के बाद अय्यर ने पत्रकारों को बताया, "हम तेल कंपनियों से कहेंगे कि पेट्रोल और डीजल की क़ीमतों में बढ़ोतरी न की जाए. हमें मुद्रा स्फ़ीति को क़ाबू में रखने के लिए मिलकर काम करना होगा." बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस मुद्दे पर विचार-विमर्श हुआ था. समीक्षा भारत में तेल कंपनियाँ अंतरराष्ट्रीय बाज़ार की क़ीमतों के आधार पर देश में पेट्रोलियम पदार्थों की क़ीमतों की हर 15 दिनों में समीक्षा कर सकतीं हैं. पिछले दिनों अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमत 50 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई. मंगलवार को कच्चे तेल की क़ीमत इस रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचीं और फिर एशिया और यूरोप के बाज़ारों में भी ये तेज़ी बनी रही. एशियाई बाज़ारों में अमरीका के कच्चे तेल की क़ीमत 50.35 डॉलर तक चली गई. 1980 के दशक के बाद पहली बार तेल की क़ीमत इस स्तर पर गई है. भारत अपनी ज़रूरत के 70 फ़ीसदी कच्चे तेल का आयात करता है जिसके लिए वह मध्य पूर्व के देशों पर निर्भर करता है. पेट्रोलियम मंत्री मणिशंकर अय्यर ने यह भी जानकारी दी कि सरकार ने पेट्रोलियम पदार्थों पर कर के स्वरूप की समीक्षा के लिए एक समिति का गठन किया है. |
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