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तेल की क़ीमतों का बढ़ना जारी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमत लगातार ऊँची जा रही है और अमरीकी तेल की क़ीमत 50 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई. कच्चे तेल की क़ीमत इस रिकॉर्ड स्तर पर पहुँची न्यूयॉर्क में और मंगलवार को एशिया और यूरोप के बाज़ारों में भी ये तेज़ी बनी रही. एशियाई बाज़ारों में अमरीका के कच्चे तेल की क़ीमत 50.35 डॉलर तक चली गई. 1980 के दशक के बाद पहली बार तेल की क़ीमत इस स्तर पर गई है. मगर संवाददाताओं का कहना है कि क़ीमतें बढ़ने के बावजूद अगर मुद्रास्फ़ीति को ध्यान में रखा जाए तो क़ीमतें 20 साल पहले के स्तर से ऊँची नहीं हैं. कारण तेल की क़ीमत में इस तेज़ी का कारण इराक़, सऊदी अरब और नाइजीरिया से तेल की आपूर्ति को लेकर जारी अनिश्चितता बताया जा रहा है. नाइजीरिया में विद्रोहियों के एक गुट ने तेल कंपनियों से कहा है कि वे अपने दफ़्तर बंद करें. इस गुट ने नाइजीरिया की सरकार के ख़िलाफ़ पूरी तरह से लड़ाई शुरु करने की भी धमकी दी है. ब्रिटेन की तेल कंपनी शेल ने पहले ही वहाँ से अपने 200 से अधिक कर्मचारियों को हटा लिया है. मगर कंपनी का कहना है कि वह नाइजीरिया के विद्रोहियों की धमकी से नहीं घबराएगी. उधर तेल उत्पादक देशों की संस्था ओपेक के अध्यक्ष ने कहा है कि वह तेल निकाले जाने के लिए निर्धारित लक्ष्यों के बारे में दिसंबर से पहले पुनर्विचार नहीं करेगी. |
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