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शुक्रवार, 18 जून, 2004 को 19:09 GMT तक के समाचार
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वामपंथी दलों ने दबाव बढ़ाया
सोनिया, मनमोहन और प्रणब मुखर्जी
वामपंथी दल सरकार को दबाव में रखना चाहते हैं
वामपंथी दलों ने रसोई गैस और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की क़ीमत बढ़ाने के मामले पर सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है.

बजट से पहले कई मुद्दों पर चर्चा करने के लिए सत्ताधारी संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन यानी यूपीए के साझीदारों की एक बैठक सोनिया गाँधी की अध्यक्षता में हुई.

इस बैठक में गठबंधन के घटक दलों, ख़ास तौर पर वामपंथी दलों को आश्वासन दिया गया कि देश के विकास और आर्थिक अनुशासन को ध्यान में रखते हुए उनकी माँगों को पूरा करने का प्रयास किया जाएगा.

वामपंथी दलों ने यह माँग प्रधानमंत्री के साथ एक बैठक में भी रखी और गठबंधन की बैठक में भी यह मुद्दा उठा.

 लगभग सभी पार्टियों ने पेट्रोलियम पदार्थों और ख़ास तौर पर रसोई गैस की क़ीमतों में कटौती करने की माँग की, अगले केंद्रीय बजट में इस चर्चा का असर दिखाई देगा
बासुदेव आचार्य

पेट्रोलियम मंत्री मणिशंकर अय्यर ने पहले ही घोषणा कर दी है कि वे तेल और रसोई गैस की बढ़ी हुई क़ीमतों को घटाने की स्थिति में नहीं हैं.

वरिष्ठ वामपंथी नेता बासुदेव आचार्य ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि "लगभग सभी पार्टियों ने पेट्रोलियम पदार्थों और ख़ास तौर पर रसोई गैस की क़ीमतों में कटौती करने की माँग की, अगले केंद्रीय बजट में इस चर्चा का असर दिखाई देगा."

प्रधानमंत्री के साथ वामपंथी नेताओं की जो बैठक हुई उसमें यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गाँधी और वित्त मंत्री पी चिदंबरम भी मौजूद थे.

कांग्रेस महासचिव अंबिका सोनी ने पत्रकारों को बताया कि यूपीए सरकार के पहले बजट में कृषि, सिंचाई, रोज़गार और ग़रीबी निवारण जैसे मुद्दों पर ख़ास ध्यान दिया जाएगा.

बड़ी बैठक

यूपीए अध्यक्ष सोनिया गाँधी की अध्यक्षता में हुई बैठक में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के शरद पवार, राष्ट्रीय जनता दल के लालू प्रसाद यादव, लोक जनशक्ति पार्टी के रामविलास पासवान, तेलंगाना राष्ट्र समिति के चंद्रशेखर राव के अलावा कई प्रमुख वामपंथी नेता मौजूद थे.

बैठक के बाद चंद्रशेखर राव ने पत्रकारों को बताया, "सारा ज़ोर इसी बात पर रहा कि अगले बजट के केंद्र में ग़रीब जनता हो, कृषि, सिंचाई, खाद्य आपूर्ति पर ध्यान दिया जाए."

इस बैठक में जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर राज्यों और बिहार के लिए विशेष आर्थिक पैकेज दिए जाने और किसानों के लिए नई ऋण योजना पर विस्तार से चर्चा हुई.

वामपंथी दलों ने यह माँग भी रखी कि कर्मचारी भविष्य निधि पर मिलने वाले ब्याज दर में आगे कोई कटौती नहीं की जाए.

घाटे में चल रही सार्वजनिक इकाइयों को दुरूस्त करने, कृषि सब्सिडी बढ़ाने और सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मज़बूत करने के सुझाव भी रखे गए.

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