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ओपेक का तेल उत्पादन बढ़ाने का फ़ैसला | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बेरूत बैठक में ओपेक देशों ने बढ़ी क़ीमतों पर लगाम लगाने के लिए तेल उत्पादन में 8.5 प्रतिशत की वृद्धि करने का फ़ैसला किया है. रोज़ाना उत्पादन के स्तर पर यह बढ़ोत्तरी 20 लाख बैरल की होगी. क़तर के तेल मंत्री अब्दुल्ला अल-अत्तिया ने यह जानकारी दी है. अभी तक इस बारे में ओपेक ने कोई बयान जारी नहीं किया है. समाचार एजेंसियों के अनुसार उत्पादन बढ़ाने का यह फ़ैसला पहली जुलाई से प्रभावी होगा. अल-अत्तिया ने कहा की जुलाई में जब ओपेक की अगली बैठक होगी तो उत्पादन में रोज़ाना अतिरिक्त पाँच लाख बैरल की वृद्धि पर सहमति बन सकती है. बीच का रास्ता बीबीसी के आर्थिक मामलों के संवाददाता एंड्रयू वॉकर के अनुसार उत्पादन बढ़ाने का फ़ैसला ओपेक ने सदस्य देशों के दो विरोधी विचारों के मद्देनज़र बीच की राह चुनी है. संगठन का प्रमुख सदस्य सऊदी अरब क़ीमतों में भारी तेज़ी से निपटने के लिए उत्पादन में भारी बढ़ोत्तरी का पक्षधर था. उसका कहना था कि कम से कम 25 लाख बैरल रोज़ाना की बढ़ोत्तरी होनी चाहिए. सऊदी अरब उत्पादन में वृद्धि के फ़ैसले को तत्काल प्रभाव से लागू कराना चाहता था. दूसरी ओर ईरान जैसे देशों का विचार था कि उत्पादन में ज़्यादा वृद्धि से क़ीमतें अचानक मुँह के बल गिर सकती हैं. उल्लेखनीय है कि उत्पादन में बढ़ोत्तरी का यह फ़ैसला ओपेक के सदस्यों के औपचारिक क़ोटा पर ही लागू होता है, जबकि विभिन्न सदस्य देश अपने स्तर पर भी उत्पादन बढ़ाते रहते हैं. इस बार सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात अपने स्तर पर तेल का उत्पादन बढ़ाने की बात कर चुके हैं. |
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