|
जी-7 का तेल उत्पादक देशों से आग्रह | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दुनिया के प्रमुख औद्योगिक देशों ने तेल उत्पादक देशों से अनुरोध किया है कि वे तेल का उत्पादन बढ़ाएँ जिससे कि तेल की ऊँची कीमत को कम किया जा सके. दुनिया के प्रमुख धनी देशों के संगठन जी-7 के वित्त मंत्रियों ने न्यूयॉर्क में बैठक में ये अनुरोध किया. वित्त मंत्रियों ने चेतावनी दी कि तेल की मौजूदा कीमतों से मुद्रास्फ़ीति की स्थिति आ सकती है और पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था में इससे मंदी आ सकती है. तेल की कीमतें पिछले 21 वर्षों में अपने उच्चतम स्तर पर चली गई हैं. आग्रह इससे पहले शनिवार को तेल उत्पादक देशों के संगठन 'ओपेक' के सदस्य तेल उत्पादन बढ़ाने के सऊदी अरब के एक प्रस्ताव पर सहमत नहीं हो सके थे. एम्सटर्डम में ओपेक के सदस्यों की बैठक में सऊदी अरब ने कहा था कि वह जून से अपनी तेल की बिक्री बढ़ा देगा. जी-7 ने इस क़दम का स्वागत करते हुए ओपेक के अन्य सदस्यों से भी ऐसा ही करने का आग्रह किया था. अब संगठन ने अपने बयान में ओपेक देशों से कहा है,"हम तेल उत्पादक देशों से आग्रह करते हैं कि वे तेल की कीमतों के संबंध में ऐसी कार्रवाई करें जिससे ये कीमतें आर्थिक समृद्धि और स्थिरता के अनुकूल स्तर पर जा सके". ओपेक के बाक़ी सदस्यों ने बढ़ती कीमतों पर चिंता तो जताई मगर तेल उत्पादन बढ़ाने का फ़ैसला बेरूत में तीन जून को होनेवाली अपनी अगली बैठक के लिए टाल दिया. अन्य कारण ओपके के कुछ सदस्यों का ये भी मानना है कि तेल की कीमतों में आए उछाल का कारण उत्पादन नहीं कुछ और है. उनका कहना है कि मध्य पूर्व में अस्थिरता और तेल की बढ़ी हुई माँग के कारण तेल की कीमतें ऊपर चली गईं. बीबीसी के आर्थिक संवाददाता का कहना है कि तेल की बढ़ती कीमतों का मुद्दा पश्चिमी जगत के देशों के लिए राजनीतिक तौर पर एक संवेदनशील विषय है. संवाददाता का कहना है कि अमरीका में इस वर्ष राष्ट्रपति चुनाव होने हैं और वहाँ तेल की कीमतों में प्रति गैलन दो डॉलर से अधिक की वृद्धि हो चुकी है. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||