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पेट्रोल और डीजल की क़ीमतों में बढ़ोत्तरी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत सरकार ने पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की क़ीमतों में बढ़ोत्तरी करने की घोषणा कर दी है. लेकिन मिट्टी के तेल की क़ीमतों में वृद्धि नहीं की गई है. पेट्रोल और डीजल की क़ीमतों में क़रीब सवा दो रुपए प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी होने की संभावना है. हालाँकि इस बारे में आख़िरी निर्णय तेल कंपनियों को ही करना है. रसोई गैस की क़ीमतों में प्रति सिलेंडर 20 रुपए की तत्काल बढ़ोत्तरी के साथ-साथ प्रति सिलेंडर की क़ीमत में हर महीने पाँच रुपए की वृद्धि करने की भी घोषणा की गई है. नई दिल्ली में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक के बाद पेट्रोलियम मंत्री मणिशंकर अय्यर ने ये घोषणा की. उन्होंने बताया कि पेट्रोल की क़ीमतों में बढ़ोत्तरी आयात शुल्क के बराबर और डीजल की क़ीमतों में वृद्धि आयात शुल्क की आधी की जा रही है. दबाव अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमतों में लगातार बढ़ोत्तरी के कारण सरकार पर यह दबाव बना हुआ था कि वह पेट्रोलियम पदार्थों की क़ीमतों में बढ़ोत्तरी करे.
लेकिन सहयोगी दलों ख़ासकर वामपंथी दलों के दबाव में केंद्र सरकार ने अभी तक कोई फ़ैसला नहीं किया था. वामपंथी पार्टियों ने पिछली बार केंद्र सरकार से कहा था कि वे चार नवंबर तक इंतज़ार करें ताकि अमरीका में राष्ट्रपति चुनाव ख़त्म हो जाए. भारत में तेल कंपनियाँ अंतरराष्ट्रीय बाज़ार की क़ीमतों के आधार पर देश में पेट्रोलियम पदार्थों की क़ीमतों की हर 15 दिनों में समीक्षा कर सकतीं हैं. भारत अपनी ज़रूरत के 70 फ़ीसदी कच्चे तेल का आयात करता है जिसके लिए वह मध्य पूर्व के देशों पर निर्भर करता है. |
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