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मतभेदों के बीच ब्रिटेन को मिली अध्यक्षता | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
यूरोपीय संघ में चल रहे मतभेदों के बीच ब्रिटेन ने संघ की अध्यक्षता संभाल ली है. अगले छह महीने तक यूरोपीय संघ की अध्यक्षता ब्रिटेन के पास रहेगी. ब्रिटेन ने वादा किया है कि इस कार्यकाल के दौरान उसका सबसे बड़ा एजेंडा होगा यूरोपीय संघ में सुधार लाना. लेकिन जानकारों का कहना है कि पिछले दिनों कृषि सब्सिडी और ब्रिटेन को बजट में मिलने वाली राहत को लेकर यूरोपीय नेताओं के बीच मतभेद ब्रिटेन के लिए सबसे बड़ी मुश्किल साबित हो सकता है. साथ ही यूरोपीय संघ के संविधान को फ़्रांस और नीदरलैंड के नकारने के बाद यूरोपीय संघ पर उठ रहे सवाल भी इस कार्यकाल में ब्रिटेन का पीछा नहीं छोड़ेंगे. ब्रिटेन के विदेश मंत्री जैक स्ट्रॉ ने गुरुवार को कहा कि ब्रिटेन इस साल के अंत तक यूरोपीय संघ में वित्तीय मुद्दों पर सहमति बनाने की कोशिश करेगा. मुद्दे बीबीसी के यूरोप संवाददाता टिम फ़्रैंक का कहना है कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर का लक्ष्य वादा करने से ज़्यादा काम करके दिखाना है. शुक्रवार को यूरोपीय आयोग के सदस्य लंदन में ब्रितानी मंत्रियों से मिलेंगे.
लंदन रवाना होने से पहले यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष ज़ोज़े मैनवेल बरोज़ो ने कृषि सब्सिडी और बजट रियायतों को जोड़ने के मुद्दे पर प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर की आलोचना की. उन्होंने कहा कि ये दोनों मुद्दे बिल्कुल अलग-अलग हैं. लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि यूरोपीय संघ के सदस्य देशों को वित्तीय मुद्दों पर सहमति के लिए ब्रिटेन की कोशिशों का समर्थन करना चाहिए. बरोज़ो ने ब्रिटेन को चेतावनी दी कि उसे बजट रियायत के मुद्दे पर समझौता करना पड़ सकता है और कृषि सब्सिडी हासिल करने वाले देशों को भी पहल करनी पड़ेगी. अध्यक्ष के रूप में कार्यकाल के दौरान ब्रिटेन के सामने एक और बड़ा मुद्दा होगा- संघ का विस्तार. इस मामले पर विदेश मंत्री जैक स्ट्रॉ ने कहा कि ब्रिटेन की सरकार तुर्की को संघ में शामिल किए जाने को लेकर विचार-विमर्श के लिए तैयार है. लेकिन उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कुछ सदस्य देशों में इस मुद्दे पर विवाद है. अध्यक्ष के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान ब्रिटेन भारत, चीन, यूक्रेन, रूस और कनाडा के साथ होने वाले यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता भी करेगा. इसके साथ-साथ ब्रिटेन को मध्य-पूर्व, ईरान और इराक़ के मुद्दे पर भी यूरोपीय संघ की विदेश नीति को सामने रखना होगा. |
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