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ब्रसेल्स सम्मेलन बिना सहमति के ख़त्म | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
यूरोपीय संघ के नए बजट पर सहमति के लिए ब्रसेल्स में हुआ शिखर सम्मेलन नाकाम हो गया है. बजट में रियायतों और कृषि सब्सिडी को लेकर ब्रिटेन और फ़्रांस के बीच मतभेद सुलझ नहीं पाया और सम्मेलन बिना किसी समझौते के ख़त्म हो गया. यूरोपीय संघ के मौजूदा अध्यक्ष और लक्ज़ेमबर्ग के प्रधानमंत्री जाँ क्लॉड युंकर ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि यूरोपीय संघ गहरे संकट में है. सम्मेलन में मतभेद ख़त्म करने के लिए ब्रिटेन के सामने अंतिम प्रस्ताव ये रखा गया कि उसे मिलने वाली रियायतों को फ़िलहाल रोक दिया जाए लेकिन ब्रिटेन ने इसे ठुकरा दिया. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने कहा है कि प्रस्ताव ठुकराने वालों में ब्रिटेन अकेला नहीं था. उन्होंने कहा कि चार अन्य देशों ने भी प्रस्ताव के ख़िलाफ़ मत दिया और दो अन्य देशों ने प्रस्ताव को लेकर अप्रसन्नता जताई थी. अगले महीने यूरोपीय संघ की अध्यक्षता ब्रिटेन के पास जा रही है. लेकिन प्रधानमंत्री ब्लेयर ने ब्रसेल्स सम्मेलन की नाकामी के बावजूद उम्मीद जताई कि यूरोपीय संघ आगे बढ़ेगा. ब्रितानी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर के एक प्रवक्ता ने कहा कि दिन में भी उनके सामने एक प्रस्ताव रखा गया था लेकिन अंतिम प्रस्ताव तो उससे भी बुरा था. ब्रिटेन का कहना है कि बजट रियायतों को यूरोपीय संघ की कृषि सब्सिडी से जोड़कर देखा जाना चाहिए लेकिन फ़्रांस कृषि सब्सिडी पर कोई भी बात सुनने को राज़ी नहीं. प्रधानमंत्री ब्लेयर के प्रवक्ता ने कहा कि प्रस्ताव में बजट रियायतों और कृषि सब्सिडी को जोड़कर नहीं जा रहा है. ब्रिटेन का कहना है कि अगर यूरोपीय बजट में उसे मिल रही 4.4 अरब यूरो ( तीन अरब पाउंड) की रियायत में कटौती की कोशिश की गई तो वह वीटो का इस्तेमाल करेगा. तर्क ब्रिटेन का तर्क है कि कृषि सब्सिडी में कटौती हो तभी उसे रियायतों पर कोई प्रस्ताव स्वीकार होगा. लेकिन फ़्रांस के राष्ट्रपति ज़्याक शिराक कृषि सब्सिडी में किसी तरह की कटौती पर विचार-विमर्श तक से इनकार कर रहे हैं. शुक्रवार को राष्ट्रपति शिराक ने यहाँ तक कह दिया ब्रिटेन को मिलने वाली रियायतों को सिर्फ़ रोका न जाए बल्कि पूरी तरह ख़त्म कर दिया जाए.
लेकिन दोपहर में स्थिति कुछ बदली और राष्ट्रपति शिराक के एक प्रवक्ता ने कहा कि राष्ट्रपति समझौते के लिए अब इस बात पर राज़ी हैं कि ब्रितानी रियायतों को फ़िलहाल रोक दिया जाए. एक फ़्रांसीसी अधिकारी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया, "रियायतों पर रोक काफ़ी नहीं है. लेकिन यह एक समझौता है और सभी समझौते की तरह हमें इस बात को स्वीकार करना पड़ेगा कि इससे सभी ख़ुश नहीं रह सकते." बीबीसी संवाददाता विलियम हॉर्सले का कहना है कि सम्मेलन में कड़वाहट रही और यह सवाल भी उठे कि यूरोपीय संघ के भविष्य का फ़ैसला किसके हाथों में है. सम्मेलन के दौरान स्वीडन ने तो यह सलाह भी दे डाली कि बेहतर यही होगा कि बजट पर कोई फ़ैसला साल भर के लिए टाल दिया जाए. ब्रसेल्स से बीबीसी संवाददाता जॉनी डायमंड का कहना है कि हालाँकि कुछ देश ब्रिटेन की कृषि सब्सिडी में कटौती की मांग से सहमत हैं लेकिन कोई देश बजट रियायतों को जारी रखने पर ब्रिटेन का समर्थन नहीं कर रहा. |
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