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संविधान मंज़ूर करने की समयसीमा बढ़ी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
यूरोपीय संघ के नेता इस बात पर सहमत हो गए हैं कि यूरोपीय संविधान को मंज़ूरी देने की समयसीमा बढ़ा दी जाए. पहले यूरोपीय संघ में शामिल देशों को नवंबर 2006 तक संविधान को मंज़ूरी देनी थी. लेकिन पहले फ़्रांस और बाद में नीदरलैंड की जनता ने जनमतसंग्रह में यूरोपीय संविधान को नकार दिया. लक्ज़ेमबर्ग के प्रधानमंत्री और यूरोपीय संघ के वर्तमान अध्यक्ष जाँ क्लॉड युंकर ने कहा कि फ़्रांस और नीदरलैंड के नतीजों के बाद इस पर चिंतन-मनन, व्याख्या और बहस का दौर चलेगा. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संविधान पर फिर से कोई बात नहीं होगी. युंकर ने कहा कि संविधान का मौजूदा प्रारूप बेहतर है और इसमें कई ऐसे सवालों के जवाब दे दिए गए हैं जिसका जवाब कई लोग जानना चाह रहे थे. यूरोपीय संविधान उसी समय अस्तित्त्व में आएगा जब संघ के सभी 25 सदस्य देश इसे मंज़ूरी दे देंगे. इस घोषणा के तुरंत बाद डेनमार्क ने सितंबर में अपने यहाँ होने वाले जनमतसंग्रह को स्थगित करने का ऐलान कर दिया. विवाद ब्रसेल्स में हो रहे यूरोपीय संघ के शिखर सम्मेलन में बजट पर भी विवाद जारी है. बजट में ब्रिटेन को रियायत देने के मुद्दा भी सम्मेलन में चर्चा का विषय बना हुआ है. ब्रिटेन का कहना है कि अगर बजट में उसे रियायत देने के मुद्दे पर कोई बदलाव की बात होती है तो कृषि सब्सिडी में कमी की भी बात करनी होगी. लेकिन फ़्रांस इस पर विचार-विमर्श से इनकार कर रहा है. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने कहा है कि बजट में ब्रिटेन के लिए 4.4 अरब यूरो की रियायत का मामला कृषि सब्सिडी से सीधे जुड़ा हुआ है. जिससे सबसे ज़्यादा लाभ फ़्रांस को है. जर्मनी के चांसलर गेरहार्ड श्रोएडर ने दोनों देशों से अपील की है कि वे कुछ समझौता करें ताकि यूरोपीय बजट पर सहमति हो सके. बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि इस मुद्दे पर ब्रिटेन और फ़्रांस के रवैए से यही लगता है कि फ़िलहाल इस मुद्दे पर प्रगति संभव नहीं दिखती. उनका कहना है कि वर्ष 2007-2013 के यूरोपीय बजट पर शुक्रवार को होनी वाली बातचीत में रुकावट आना तय है. ब्रिटेन के विदेश मंत्री जैक स्ट्रॉ ने धमकी दी है कि अगर ब्रिटेन को रियायत देने के मुद्दे पर कोई फेरबदल की कोशिश हुई तो वे वीटो का इस्तेमाल करेंगे. संविधान यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष ज़ोज़े मैनवेल बरोज़ो ने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि हम इस पर विचार-विमर्श करें कि फ़्रांस और नीदरलैंड की जनता ने संविधान को क्यों नकार दिया.
लेकिन उन्होंने कहा कि मौजूदा संविधान के प्रारूप को त्याग देना भी जल्दबाज़ी होगी. बरोज़ो ने कहा, "हम संविधान को नहीं छोड़ सकते और न ही कामकाज ऐसे ही जारी रखना चाहते हैं और न यह दावा कर रहे हैं जैसे कुछ हुआ ही न हो." उन्होंने कहा कि सभी यूरोपीय देशों में इस मुद्दे पर विचार-विमर्श होगा और अभी यह कहना मुश्किल है कि बहस का क्या नतीजा होगा. हालाँकि फ़्रांस के राष्ट्रपति ज़्याक शिराक ने सलाह दी है कि यूरोपीय संघ के भविष्य पर आपात सम्मेलन बुलाया जाए. |
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