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जर्मनी से व्यापार बढ़ाने पर ज़ोर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जर्मनी के चांसलर गेरहार्ड श्रोडर की भारत यात्रा के दौरान मुख्य रूप से निवेश, व्यापार और सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता पर बातचीत हुई. भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि दोनों देशों के बीच जितना व्यापार संभव है, मौजूदा व्यापार उससे बहुत कम है. भारतीय प्रधानमंत्री ने कहा कि वे जर्मनी से और अधिक निवेश की उम्मीद करते हैं और भारत से सूचना प्रौद्योगिकी के निर्यात में दस गुना तक वृद्धि की आशा करते हैं. चांसलर श्रोडर ने आशा व्यक्त की कि द्विपक्षीय व्यापार पिछले वर्ष के रिकॉर्ड स्तर पाँच अरब यूरो को भी पार कर लेगा. श्रोडर ने कहा कि यह आपसी सहयोग का हिस्सा है कि भारत और जर्मनी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए एक साथ प्रयास करें. सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महाधिवेशन के दौरान चार राष्ट्रों, भारत, जर्मनी, ब्राज़ील और जापान ने तय किया था कि वे एकजुट हो कर, सुरक्षा परिषद के विस्तार का प्रयास करेंगे. श्रोडर ने यह भी कहा कि जी-8 में भारत की किस प्रकार भागीदारी हो इसके तरीक़े भी खोजे जाएँगे लेकिन भारत से जर्मनी जाने के इच्छुक सूचना टेक्नॉलॉजी के माहिरों के लिए रास्ता आसान होगा, इसकी कोई गारंटी उन्होंने नहीं दी. दोनों देशों के बीच परस्पर सहमति के कई क्षेत्रों पर चर्चा तो हुई ही, साथ ही परमाणु अप्रसार पर भी भारत के प्रधानमंत्री ने अपना रूख़ स्पष्ट कर दिया. मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत एक परमाणु शक्ति है, लेकिन वह पूरी तरह ज़िम्मेदार है. परमाणु अप्रसार संधि के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा, "हम यह नहीं समझते हैं कि अभी इस पर हस्ताक्षर करने का समय आ गया है. भारत ख़ुद संयम बरतने पर यक़ीन करता है. हमने इस प्रकार की सामग्री के निर्यात पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं, क्षेत्र के कुछ अन्य़ देशों की तरह नहीं." जर्मन चांसलर पिछली बार 2001 में भारत आए थे और कल एशिया-यूरोप शिखर सम्मेलन में भाग लेने हनोई जाएँगे. वे इसी यात्रा के दौरान अफ़गानिस्तान और पाकिस्तान भी जाएँगे. यूरोपीय संघ के साथ व्यापार में, जर्मनी भारत का दूसरा सबसे बड़ा साझीदार है. |
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