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नए-पुराने सदस्यों की आशंकाएँ और चिताएँ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
यूरोपीय संघ के एक अध्ययन में पता चला है संघ में हाल में शामिल होने वाले दस सदस्यों की कामकाज वाली आबादी का सिर्फ़ एक प्रतिशत हिस्सा ही संघ के सदस्य देशों में जाना पसंद करेगी. यानी ज़्यादातर आबादी अपने ही देश में रहना पसंद करती है और 99 प्रतिशत लोग तमाम आज़ादियों के बावजूद दूसरे देशों में जाना पसंद नहीं करेंगे. इस एक प्रतिशत का भी मतलब होगा कि यूरोपीय संघ के विस्तार के बाद हर साल क़रीब दो लाख बीस हज़ार लोग एक से दूसरे देश में जाएंगे और यह सिलसिला पहले पाँच साल तक जारी रहने की संभावना है. लेकिन 2002 में कराए गए इस अध्ययन में यह आशंका भी व्यक्त की गई है कि यूरोपीय संघ के नए सदस्यों की युवा और सुशिक्षित आबादी दूसरे देशों में जा सकती है. दो साल पहले हुए इस अध्ययन के आँकड़ों को आज भी विश्वसनीय माना जा रहा है, हालाँकि तब यह पता नहीं था कि यूरोपीय संघ के कितने सदस्य देशों की सरकारें नए शामिल होने वाले सदस्य देशों पर श्रम संबंधी पाबंदियाँ लगाते हैं या नहीं.
और आयरलैंड के अलावा बाक़ी सभी देशों ने ऐसी पाबंदियाँ लगाने का फ़ैसला किया है क्योंकि उन्हें डर है कि अगर ऐसा नहीं करेंगे तो दूसरे देशों से भारी संख्या में लोग आने लगेंगे जिससे उनकी कल्याणकारी शासन व्यवस्था पर भारी बोझ पड़ेगा. यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष रोमानो प्रोदी ने इस चलन की आलोचना की है. "मैं पहले ही अपनी गहरी चिंता ज़ाहिर कर चुका हूँ क्योंकि यह भलमनसाहत वाला रवैया नहीं है. यह वह भावना नहीं है जिसमें मैं काम करता हूँ." पक्का इरादा अध्ययन से पता चलता है कि जो लोग अपने देश से दूसरे देश में जाने के पक्की तरह से इच्छुक थे उनकी संख्या सिर्फ़ एक प्रतिशत थी. इसका सीधा सा मतलब होगा कि पहले पाँच साल में क़रीब दस लाख लोग अपने से अच्छे देश में जाना पसंद करेंगे. अगर इसमें उन लोगों की संख्या भी जोड़ दी जाए जिन्होंने दूसरे देशों में जाने की मंशा ज़ाहिर की थी तो यह आँकड़ा चौगुना हो सकता है. अप्रेल 2002 में किए गए इस अध्ययन में साइप्रस और माल्टा में 500-500 लोगों से और बाक़ी अन्य देशों में एक-एक हज़ार लोगों से राय जानी गई. पोलैंड और तुर्की जैसे बड़े देशों में दो-दो हज़ार लोगों से सवाल जाने गए. इस अध्ययन में यह नहीं बताया गया है कि अपना देश छोड़कर जाने वालों की पहली पसंद कौन सा देश होगा. ग़रीबी से तंग रोमानिया और बल्गारिया दोनों ही देश 2007 में यूरोपीय संघ में शामिल होंगे लेकिन इन दोनों ही देशों में सबसे ज़्यादा ऐसे लोग मिले जो किसी दूसरे देश में जाकर रहना या काम करना पसंद करेंगे. ऐसे दो प्रतिशत लोग थे जिन्होंने किसी अन्य देश में जाकर रहने या काम करने का पक्का इरादा ज़ाहिर किया. पोलैंड में एक प्रतिशत ऐसे लोग थे जबकि मई में शामिल हो रहे अन्य देशों में ऐसे लोग एक प्रतिशत से भी कम थे जो किसी अन्य देश में जाकर रहना या काम करना पसंद करेंगे. तुर्की एक मात्र ऐसा देश है जहाँ के लोगों ने किसी अन्य देश में जाकर रहने या काम करने की मंशा ज़ाहिर की और यह संख्या थी सिर्फ़ 0.6 प्रतिशत. |
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