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यूरोपीय संघ का सफ़रनामा-3 | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
28 फ़रवरी, 1967 एक बड़ी संधि की जाती है जिसमें तीन यूरोपीय संगठनों को मिला दिया जाता है. 29 फ़रवरी, 1968 यूरोपीय समुदाय का सीमाशुल्क मिलाकर एक कर दिया जाता है. एक मार्च, 1973 ब्रिटेन, डेनमार्क और आयरलैंड को आख़िरकार यूरोपीय समुदाय में शामिल होने का मौक़ा मिल जाता है. दस साल पहले फ्रांस के राष्ट्रवादी राष्ट्रपति चार्ल्स डी गॉल ने उनके शामिल होने का विरोध किया था और वीटो का इस्तेमाल भी कर डाला था. इस बारे नॉर्व को भी शामिल कर लिया गया और इस सभी देशों ने 1972 में संधि पर हस्ताक्षर कर दिए थे. लेकिन नॉर्वे के लोगों ने बाद में एक जनमतसंग्रह में इसे नामंज़ूर कर दिया. डेनमार्क और आयरलैंड में हुए जनमतसंग्रहों में इस मंज़ूरी मिल गई. ब्रिटेन ने 1975 तक जनमतसंग्रह नहीं कराया था और उसने तब अपनी शर्तों पर फिर से विचार किया जिसे देश में भी मंज़ूरी मिल गई. एक मार्च, 1979 यूरोपीय मुद्रा प्रणाली बनने के साथ ही यूरोपीय संघ की संभावित एकल मुद्रा पर विचार किया गया और विभिन्न देशों की मुद्रा को एकल यूरोपीय मुद्रा में बदलने की दरों के बारे में भी एक प्रणाली बनाई गई. यूरोपीय संघ के बजट वग़ैरा के लिए इसी मुद्रा का इस्तेमाल किया जाने लगा और र्टेवलर चैकों और बैंकों में राशि जमा करने में भी इस मुद्रा का इस्तेमाल होने लगा. ब्रिटेन के अलावा यूरोपीय संघ के सभी देश इस मुद्रा प्रणाली में शामिल हो गए.
एक मार्च, 1981 ग्रीस यूरोपीय संघ का दसवाँ सदस्य बना. एक मार्च, 1985 ज़्याक डेलर्स यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष बने और उन्होंने प्रस्ताव रखा कि यूरोपीय समुदाय को सदस्य देशों के बीच मुक्त व्यापार को बढ़ावा देने और धन और श्रम की आवाजाही की रफ़्तार बढ़ाने के लिए तमाम बाधाओं को 1992 तक दूर करने के लिए प्रयास करने चाहिए. डेलर्स का विचार था कि एक साझा मुक्त बाज़ार बनने से ना सिर्फ़ यूरोपीय एकीकरण में तेज़ी आएगी बल्कि यह आर्थिक से राजनीतिक पटल पर भी ताक़त हासिल कर सकेगा. ख़ासतौर से अमरीका के सामने खड़ा होने के लिए इसे बहुत महत्वपूर्ण समझा गया. एक मार्च, 1986 पुर्तगाल और स्पेन भी यूरोपीय समुदाय में शामिल हुए और यूरोपीय झंडा भी लहराया गया. एक मार्च, 1987 एकल यूरोपीय अधिनियम (एसईए) वजूद में आया. इसने रोम संधि में कुछ सुधार किए जिसमें एक साझा बाज़ार को पूरा करने के बारे में प्रावधान किए गए थे. एसईए ने बहुत से क्षेत्रों में देशों के वीटो अधिकार ख़त्म कर दिए जिससे यूरोपीय संसद को ज़्यादा वैधानिक ताक़त मिल गई. इसी के साथ सदस्य देशों ने एक यूरोपियन यूनियन यानी यूरोपीय संघ बनाने के प्रति संकल्प व्यक्त किया. एक मार्च, 1988 बाज़ार में उदारीकरण को उत्तरी यूरोप के ज़्यादा विकसित देशों के फ़ायदे के रूप में देखा गया और दक्षिणी यूरोप के ग़रीब देशों ने इसके लिए मुआवज़े की माँग की. इसके बाद एक समझौता हुआ जिसमें ग़रीब देशों को संस्थागत सहायता राशि दोगुनी करने का प्रावधान किया गया. तीन सितंबर, 1990 ब्रिटेन भी यूरोपीय मुद्रा दर प्रणाली में शामिल हो गया. एक मार्च, 1991 माश्ट्रिश्ट संधि पर दिसंबर में हस्ताक्षर किए गए थे और मार्च में इसके लागू होने के साथ ही यूरोपीय समुदाय को यूरोपीय संघ में तब्दील कर दिया गया. इस संधि से यूरोपीय मुद्रा संघ वजूद में आया और सामाजिक नीति का एक अध्याय भी जोड़ा गया. ब्रिटेन ने इन दोनों पर ही फिर से विचार विमर्श किया. इस संधि से यूरोपीय नागरिकता शुरू की गई और यूरोपीय नागरिकों को अधिकार दिया गया के वे किसी भी देश में रह सकते हैं और कहीं के भी चुनावों में वोट डाल सकते हैं. विदेशी मामलों, सुरक्षा विदेशियों को शरण देने और आव्रजन के मामलों में और ज़्यादा यूरोपीय सहयोग का आहवान किया गया. एक मार्च 1992 उबलते मुद्रा बाज़ार ने यूरोपीय मुद्रा दर प्रणाली पर ख़ासा दबाव बना दिया. दर प्रणाली के गठन का इरादा यह था कि यूरोप की एकल मुद्रा चलाने से पहले विभिन्न मुद्राओं की क़ीमतों के बारे में कोई सर्वसम्मत रास्ता निकाला जा सके. ब्रिटेन की मुद्रा पाउंड बाज़ार की अस्थिरता की वजह से कुछ कमज़ोर हो गया जिसे देखते हुए ब्रिटेन सरकार ने पाउंड की एक आधार क़ीमत बढ़ा दी ताकि पाउंड की ख़रीददारी में बढ़ोत्तरी हो सके. लेकिन लोगों ने पाउंड को बेचना जारी रखा जिससे ब्रिटेन सरकार को यूरोपीय मुद्रा दर प्रणाली से अपनी मुद्रा को हटाना पड़ा. एक मार्च, 1993 माश्ट्रिश्ट संधि में यूरोपीय समुदाय को यूरोपीय संघ में तब्दील तो कर दिया गया था लेकिन सदस्य देशों में जनमतसंग्रहों के ज़रिए इसे मंज़ूरी का प्रावधान रखा गया था जोकि ख़ासा मुश्किल काम था. डेनमार्क के लोगों ने जनमतसंग्रह के ज़रिए जून 1992 में इसे नामंज़ूर कर दिया लेकिन अगले साल यानी 1993 में मई में हुए दूसरे जनमतसंग्रह में इसे मंज़ूर कर लिया गया. फ्रांस में इसे मामूली अंतर से मंज़ूरी मिली. जर्मनी और ब्रिटेन सहित बहुत से अन्य देशों में भी लोगों में ख़ासी नाराज़गी नज़र आई. |
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