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रविवार, 19 सितंबर, 2004 को 09:17 GMT तक के समाचार
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मनमोहन मिले ब्लेयर से
मनमोहन सिंह
ब्रितानी प्रधानमंत्री के आवास 10 डाउनिंग स्ट्रीट पर टोनी ब्लेयर के साथ मनमोहन सिंह
भारत के प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह क़रीब एक सप्ताह के विदेश दौरे के पहले चरण में ब्रिटेन पहुँच गए हैं जहाँ सोमवार को उन्होंने प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर से मुलाक़ात की.

इस मुलाक़ात के बाद एक संयुक्त बयान जारी होने की संभावना है.

दोनो देशों के नेताओं की अंतरराष्ट्रीय 'आतंकवाद', लोगों का अवैध तरीके से आना-जाना, आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर बातचीत होगी.

समाचार माध्यमों के अनुसार उम्मीद जताई जा रही है कि भारत और ब्रिटेन के बीच मंत्री स्तर पर एक संयुक्त आर्थिक और व्यापार समिति बन सकती है.

प्रधानमंत्री सोमवार को ही कई बड़ी कंपनियों के मुख्य कार्यकारियों से मिल रहे हैं और वे ब्रिटेन की लेबर पार्टी से संबंधित - 'फ़्रेंड्स ऑफ़ इंडिया' संगठन के नेताओं से भी मिलेंगे.

प्रधानमंत्री का पद संभालने के बाद पश्चिमी देशों का उनका यह पहला दौरा है जिसमें वह संयुक्त राष्ट्र महासभा को भी संबोधित करेंगे.

इस यात्रा के दौरान वह अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश और पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के साथ-साथ कई अन्य देशों के नेताओं को भी मिलेंगे.

मुख्य विषय

मनमोहन सिंह ने भारत से रवाना होने से पहले कहा, "मैं संयुक्त राष्ट्र को संबोधित करुँगा. संयुक्त राष्ट्र में सुधारों के साथ-साथ मैं भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता दिए जाने की वकालत भी करुँगा. इस माँग को कई ओर से अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिल रहा है."

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता पाने की भारत की उम्मीद के बारे में वह कहते रहे हैं कि भारत की यह आकांक्षा बिलकुल जायज़ है और यदि संयुक्त राष्ट्र में सुधार करना है तो भारत के हितों और चिंताओं को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता.

 मैं संयुक्त राष्ट्र को संबोधित करुँगा. संयुक्त राष्ट्र में सुधारों के साथ-साथ मैं भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता दिए जाने की वकालत भी करुँगा. इस माँग को कई ओर से अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिल रहा है
मनमोहन सिंह

इस यात्रा में उनके अंतरराष्ट्रीय समुदाय से 'आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई' में दोहरी नीति न अपनाने पर भी चर्चा करने की संभावना है.

पाकिस्तान से भारत में कथित सीमापार घुसपैठ के बारे में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पहले ही कह चुके हैं कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के जनवरी 2004 के बयान के बावजूद सीमापार घुसपैठ बढ़ी है.

भारत पर लगातार दबाव पड़ता रहा है कि वह व्यापक परमाणु परीक्षण निषेध संधि यानि सीटीबीटी और परमाणु अप्रसार संधि यानि एनपीटी पर हस्ताक्षर करे.

भारत मानता है कि जब तक परमाणु हथियार रखने वाले सभी देशों के लिए इन संधियों के तहत एक जैसे नियम लागू नहीं होते तब तक इन संधियों का मक़सद पूरा नहीं होगा और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भारत के हितों का ध्यान रखते हुए इन पर देश का रुख़ स्पष्ट कर सकते हैं.

बुश, मुशर्रफ़ से मुलाकात

अमरीका में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश से पहली बार मुलाकात करेंगे.

अमरीका ने भारतीय प्रधानमंत्री की इस यात्रा से पहले परमाणु संयंत्रों से संबंधित कुछ प्रतिबंध हटाने और प्रद्यौगिकी के आदान-प्रदान में ढील देने की घोषणाएँ की है.

वे पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ से भी पहली बार मिलेंगे और दोनो देशों के विदेश मंत्रियों की हाल की मुलाकात के बाद भारत-पाकिस्तान शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की बातचीत हो सकती है.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह 23 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र के सत्र को संबोधित करेंगे.

संयुक्त राष्ट्र की आम सभा का सत्र ऐसे समय हो रहा है जब इस अंतरराष्ट्रीय संगठन में सुधारों की बात हो रही है.

इस संदर्भ में संयुक्त राष्ट्र की संस्थाओं में फ़ैसला करने की प्रक्रिया में सुधार और सुरक्षा परिषद के विस्तार पर विशेष तौर पर चर्चा की जा रही है.

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