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गुरुवार, 15 सितंबर, 2005 को 02:51 GMT तक के समाचार
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'नहीं चलतीं सरकारें जनता की मर्ज़ी से'
अधिकतर लोगों ने कहा कि उनके फ़ैसले उनके परिवार की ज़रूरतों के हिसाब से तय होते हैं
बीबीसी के लिए किए गए एक सर्वेक्षण से पता चलता है कि दुनिया भर में 65 प्रतिशत लोग ये नहीं मानते हैं कि उनके देश का शासन जनता की इच्छा से चल रहा है.

बीबीसी वर्ल्ड सर्विस ने इस सर्वेक्षण में ये जानने का प्रयास किया कि दुनिया में सबसे अधिक ताक़तवर व्यक्ति या संस्था कौन हैं.

सीधा सवाल ये था - आपकी दुनिया कौन चलाता है?

'गैलप इंटरनेशनल वॉयस ऑफ़ द पीपुल 2005' नाम के इस सर्वेक्षण में 68 देशों के 50,000 से भी अधिक लोगों के विचार एकत्र किए गए.

केवल दक्षिण अफ़्रीका और स्कैंडिनेविया में ऐसे लोगों की संख्या अधिक थी जो मानती है कि उनके यहाँ शासन उनके मर्ज़ी के मुताबिक़ चल रहा है.

जिन देशों में लोगों ने माना कि सरकारें जनता की इच्छा का प्रतिनिधित्व नहीं करतीं, उनमें भारत और पाकिस्तान भी शामिल हैं.

विभिन्न सवालों पर विभिन्न देशों की राय में कुछ अंतर रहे लेकिन एक सवाल पर तक़रीबन सभी देशों में जवाब एक समान मिला.

भारत से लेकर पाकिस्तान और अमरीका से लेकर अफ़्रीका, सबने ये माना कि वे जो भी फ़ैसले लेते हैं, उनके पीछे सबसे गहरा प्रभाव उनके परिवार या जीवनसाथी का होता है.

चुनाव और राजनेता

भरोसा नहीं है लोगों को अपने राजनेताओं पर

सर्वेक्षण में अधिकतर लोग राजनेताओं पर विश्वास नहीं करते हैं और उन्हें लगता है कि बुद्धिजीवियों को और अधिकार दिए जाने चाहिए.

ये पाया गया कि केवल 13 प्रतिशत लोग राजनेताओं पर विश्वास करते हैं जबकि केवल 16 प्रतिशत लोग मानते हैं कि उन्हें अधिक अधिकार दिया जाना चाहिए.

एक तिहाई लोग मानते हैं कि लेखकों और पढ़ने-पढ़ाने के काम में लगे लोगों को और शक्तिशाली होना चाहिए.

25 प्रतिशत लोग मानते हैं कि धार्मिक नेताओं को ताक़तवर होना चाहिए.

वहीं 20 प्रतिशत लोग मानते हैं कि सैनिकों, व्यवसायियों और पत्रकारों को और अधिक शक्तियाँ दी जानी चाहिए.

पाकिस्तान में धार्मिक नेताओं पर अधिक भरोसा है लोगों को

जहाँ तक चुनाव का प्रश्न है तो 47 प्रतिशत लोग मानते हैं कि उनके देश में चुनाव निष्पक्ष और स्वतंत्र होते हैं.

यूरोपीय देशों में 82 प्रतिशत तक और अमरीका तथा कनाडा में 55 प्रतिशत लोग मानते हैं कि वहाँ चुनाव निष्पक्ष होते हैं.

लेकिन पश्चिमी अफ़्रीका में केवल 24 प्रतिशत लोग अपने यहाँ के चुनाव को निष्पक्ष मानते हैं.

भारत में दो-तिहाई यानी 65 प्रतिशत से अधिक लोगों को चुनाव निष्पक्ष नहीं लगते.

भारत और पाकिस्तान

भारत वैसे तो जनसंख्या के आधार पर दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है लेकिन बीबीसी के सर्वे से पता चलता है कि वहाँ अधिकतर लोग राजनेताओं की अपेक्षा सेना और पुलिस पर अधिक भरोसा करते हैं.

वहीं पाकिस्तान में, जहाँ कि अधिकतर समय तक सत्ता सेना के हाथ में रही, वहाँ एक सेना और पुलिस से अधिक भरोसा लोगों को धार्मिक नेताओं पर है.

एक तिहाई लोगों ने कहा कि वे सेना और पुलिस पर अधिक भरोसा करते हैं. लेकिन 50 प्रतिशत लोग धार्मिक नेताओं पर भरोसा करते हैं.

लेकिन राजनेताओं के मामले में जहाँ भारत में केवल 10 प्रतिशत लोग राजनेताओं पर भरोसा करते हैं, पाकिस्तान में 31 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे राजनेताओं पर विश्वास करते हैं.

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