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गुरुवार, 09 दिसंबर, 2004 को 14:33 GMT तक के समाचार
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हर साल 10 खरब रुपए की रिश्वत!
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'ट्राँस्पेरेंसी इंटरनेशनल' ने दुनिया के 64 देशों के पचास हज़ार लोगों से भ्रष्टाचार के बारे में पूछा
संयुक्त राष्ट्र गुरुवार को 'भ्रष्टाचार विरोध दिवस' मनाया जा रहा है.

विश्व बैंक के अनुसार दुनिया में हर साल लगभग 10 खरब रुपए की रिश्वत दी जाती है.

रिश्वतखोरों और भ्रष्ट नेताओं और अफ़सरों से लोग कितने प्रभावित हैं ये देखने के लिए भ्रष्टाचार विरोधी संगठन 'ट्राँस्पेरेंसी इंटरनेशनल' ने एक अध्ययन भी प्रकाशित किया है.

'ट्राँस्पेरेंसी इंटरनेशनल' ने दुनिया के 64 देशों के पचास हज़ार लोगों से भ्रष्टाचार के बारे में पूछा.

इनमें दस में से एक व्यक्ति ने कहा कि पिछले एक साल में उनके परिवार के कम से कम एक व्यक्ति को अपना काम करवाने के लिए रिश्वत देनी पड़ी.

पाँच देश ऐसे थे जिनमें एक-तिहाई लोगों ने कहा कि पिछले एक साल में उनके परिवार के लोगों को रिश्वत देनी पड़ी है.

ये देश हैं नाइजीरिया, कीनिया, लिथुएनिया और मॉल्डोवा.

नेताओं से परेशान भारतीय

भारत, अर्जेंटीना, इक्वेडोर और पेरू सहित कई देशों में लोग परेशान हैं भ्रष्ट राजनेताओं और राजनीतिक दलों से.

भारत में लोगों के मुताबिक नेताओं और पार्टियों के बाद नंबर आता है अदालतों, पुलिस और सीमा शुल्क अधिकारियों का.

भारतीय लोगों की नज़र में इन क्षेत्रों की तुलना में जहाँ भ्रष्टाचार कुछ कम है वो हैं निजी कंपनियाँ, मीडिया और ग़ैर सरकारी संस्थाएँ.

दिलचस्प बात ये है कि इन सबमें सबसे कम भ्रष्ट मानी जाती है भारतीय सेना.

पुलिस से तंग पाकिस्तानी

उधर पाकिस्तान के लोगों के बारे में अध्ययन से स्पष्ट होता है कि वहाँ लोग सबसे ज़्यादा नाराज़ हैं भ्रष्ट पुलिस महकमे से.

उसके बाद नंबर आता है भ्रष्ट राजनेताओं और राजनीतिक दलों का, कर अधिकारियों का. लेकिन पाकिस्तान में सेना को भी कुछ हद तक भ्रष्ट माना जाता है.

भारत और पाकिस्तान में लोग शिक्षण संस्थाओं को भी भ्रष्टाचार में लिप्त मानते हैं.

क्या भ्रष्टाचार की इस घोर अंधेरी रात की सुबह लोगों को नज़र आती है? क्या आने वाले तीन वर्षों में भ्रष्टाचार में कमी आ सकती है?

इस सवाल के जवाब में जहाँ पाकिस्तान के लोग कुछ आशावादी नज़र आते हैं वहीं भारत के जिन लोगों से बात की गई उनमें से लगभग आधे लोगों ने निराशा ही व्यक्त की.

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