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सुन्नी समर्थन के बिना पेश होगा संविधान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ी संसद के अध्यक्ष ने कहा है कि नए संविधान के मसौदे को को रविवार को संसद में पेश कर दिया जाएगा. लेकिन सुन्नी नेता अभी भी इसका समर्थन नहीं कर रहे हैं और उन्होंने कुर्दों और शियाओं की पसंद वाले मसौदे को देश के लिए ख़तरनाक बताया है. इराक़ी संसद के अध्यक्ष हाजिम अल हसनी ने कहा है कि नए संविधान के मसौदे में सुन्नी नेताओं की कुछ चिंताओं को जगह दी गई है. उन्होंने उम्मीद जताई कि सुन्नी अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधि इस मसौदे को स्वीकार कर लेंगे. इराक़ में संविधान के मसौदे को 15 अगस्त को ही संसद से स्वीकृति दिलाई जानी थी लेकिन मतभेदों के कारण समयसीमा को दो बार बढ़ाना पड़ा है. तय योजना के अनुसार प्रस्तावित संविधान पर अक्तूबर के मध्य तक जनमत संग्रह कराया जाना है. इसके बाद इस वर्ष दिसंबर के मध्य तक इराक़ में चुनाव कराए जाने की योजना है. विरोध इराक़ में नए संविधान पर सहमति के लिए बातचीत में भाग लेनेवाले सुन्नी वार्ताकारों में से एक सालेह अल मुतलक़ ने इस मसौदे को अस्वीकार कर दिया है. उन्होंने बताया कि वार्ताकारों ने जितना संभव था उतना प्रयास किया और ये इराक़ी जनता पर निर्भर है कि वे जनमत संग्रह में क्या फ़ैसला करते हैं. वार्ताकार ने ख़ासतौर पर तेल और जल संसाधनों के बँटवारे के तरीक़े पर चिंता जताई और कहा कि इससे देश बँटेगा. इस बीच एक अन्य घटना में अमरीकी सेना ने कहा है कि पिछले तीन दिनों में बग़दाद के निकट स्थित अबू ग़रेब जेल से 1000 बंदियों को रिहा किया गया है. इससे पहले कभी अबू ग़रेब जेल से इतनी बड़ी संख्या में बंदियों को रिहा नहीं किया गया और समझा जाता है कि ये क़दम सुन्नी धड़े की अपील के बाद उठाया गया है. |
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