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गज़ा से यहूदी बस्तियाँ हटाने का काम शुरू | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
गज़ा से यहूदी बस्तियों को हटाने की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू हो गई है. इसराइली सैनिकों ने किसूफ़िम सीमा को सील कर दिया है जो इस बात का संकेत है कि अब गज़ा में प्रवेश करना अवैध होगा. अब इसराइली सैनिक यहूदी बस्तियों में रह रहे लोगों को नोटिस दे रहे हैं. बस्ती छोड़ने के लिए अब इन लोगों के पास सिर्फ़ 48 घंटे हैं और अगर उन्होंने इस पर अमल नहीं किया तो सैनिक बलपूर्वक उन्हें वहाँ से हटा देंगे. यह पहला मौक़ा है जब इसराइल 1967 के मध्य-पूर्व युद्ध के बाद हथियाए गए किसी फ़लस्तीनी इलाक़े को ख़ाली कर रहा है. प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन की इस विवादित योजना के तहत गज़ा पट्टी से 20 से ज़्यादा यहूदी बस्तियाँ हटाई जाएँगी. इसके अलावा पश्चिमी तट के उत्तरी इलाक़े से भी कई यहूदी बस्तियों को हटाने की योजना है. गज़ा योजना पर विरोध को देखते हुए 40 हज़ार से ज़्यादा सैनिकों और पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है. इसराइल के साथ-साथ फ़लस्तीनी प्रशासन ने भी गज़ा पट्टी के आसपास के इलाक़ों में सुरक्षा बलों को तैनात किया है. फ़लस्तीनी सुरक्षा बलों को इसलिए तैनात किया गया है कि ताकि यहूदी बस्तियाँ हटाए जाने के क्रम में चरमपंथी गुट उन पर हमला न करें. दूसरी ओर इसराइली प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन ने भी दो-टूक शब्दों में कह दिया है कि अगर चरमपंथी गुटों ने हमला करने की कोशिश की तो उसका मुँहतोड़ जवाब दिया जाएगा. बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि इलाक़े में तनाव है. इसराइली सैनिकों ने गज़ा की यहूदी बस्तियों की ओर आने वाली सभी सड़कों को सील कर दिया है. कार्रवाई गज़ा पट्टी से यहूदी बस्तियाँ हटाने जाने की आधिकारिक कार्रवाई शुरू होने का मतलब ये है कि अब इसराइली सैनिक बस्ती में मौजूद हर घर तक जाएँगे और लोगों को नोटिस देंगे.
अगर किसी घर से उन्हें कोई जवाब नहीं मिला, तो नोटिस दरवाज़े पर लगा दिया जाएगा. नोटिस देने के बाद वहाँ के लोगों के पास बस्ती ख़ाली करने के लिए सिर्फ़ 48 घंटे होंगे. अगर इस दौरान लोग वहाँ से नहीं हटे, तो बस्ती ख़ाली करने के लिए सैनिक हस्तक्षेप करेंगे. बस्ती में रहने वाले कई लोगों का कहना है कि वे सैनिकों की अनदेखी कर देंगे. जबकि कई लोगों का कहना है कि वे विरोध करेंगे. बस्ती में रहने वाले कई लोग तो पहले ही वहाँ से चले गए हैं लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में लोग वहाँ मौजूद हैं. आधिकारिक कार्रवाई शुरू होने से पहले एक यहूदी ने अपने घर में आग लगा दी. याकोव मज़ाल तारी नाम के इस किसान ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया, "मैं फ़लस्तीनियों के लिए अपनी कोई चीज़ नहीं छोड़ना चाहता." |
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