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इसराइल को ब्रितानी परमाणु मदद
ब्रितानी दस्तावेज़
बीबीसी के हाथ कुछ ऐसे दस्तावेज़ लगे हैं जिनसे यह पता चलता है कि ब्रिटेन ने 1958 में इसराइल के परमाणु कार्यक्रम के लिए गुप्त रूप से एक महत्वपूर्ण सामग्री बेची थी.

ब्रिटेन के राष्ट्रीय संग्रहलाय में मौजूद दस्तावेज़ों से पता चलता है कि क़रीब 15 लाख पाउंड स्टर्लिंग के बदले बीस टन भारी पानी का निर्यात करने के लिए समझौता किया गया था.

यह इसराइल के नीगेव रेगिस्तान में गोपनीय दिमोना परमाणु संयंत्र में प्लूटोनियम के उत्पादन के लिए बहुत महत्वपूर्ण था.

इस पर "केवल शांतिपूर्ण इस्तेमाल के लिए" की मोहर लगाई गई थी.

हैरॉल्ड मैकमिलन की सरकार में मंत्रिगण इस समझौते से अनजान थे. इसे अमरीका से भी छुपाकर रखा गया था.

एक दस्तावेज़ में ब्रितानी विदेश मंत्रालय के अधिकारी डोनाल्ड केप ने टिप्पणी लिखी थी, "कुल मिलाकर मैंने इस बारे में अमरीकियों को भी नहीं बताने का रास्ता चुना."

अमरीका ने इसराइल को भारी पानी की आपूर्ति करने से इनकार कर दिया था बशर्ते कि इसराइल यह गारंटी दे कि उसका इस्तेमाल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए किया जाएगा.

1961 से अमरीकी राष्ट्रपति जॉन एफ़ कैनेडी के रक्षा मंत्री रहे रॉबर्ट मैकनामरा ने बीबीसी को बताया कि वह इस राज़ पर चकित हैं.

उनका कहना था, "यह बहुत चौंकाने वाली बात है कि हमें इस बारे में नहीं बताया गया क्योंकि हमने परमाणु बम के बारे में ब्रिटेन के साथ सूचनाओं का आदान-प्रदान किया था."

रॉबर्ट मैकनामरा का कहना था, "यह तथ्य कि इसराइल परमाणु बम बनाने की कोशिश कर रहा था, अपने आप में इतना चौंकाने वाला नहीं जितना ये कि ब्रिटेन ने इसराइल को भारी पानी की आपूर्ति की होगी."

समझौता

ब्रिटेन ने 1956 में नोर्वे से ख़रीदी गई खेप में से अतिरिक्त भारी पानी को एक ब्रितानी पोर्ट से ही इसराइल के लिए रवाना किया था और अधिकारियों ने इसे नोर्वे और इसराइल के बीच हुए समझौते के रूप में पेश किया था.

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दस्तावेज़ों से पता चलता है कि सौदे को नोर्वे से हुआ दिखाया गया

कंज़रवेटिव पार्टी के पूर्व रक्षा और विदेशी मामलों के मंत्री लॉर्ड गिलमोर ने बीबीसी से कहा कि ये राज़ खुलना एक 'असाधारण' बात है.

उन्होंने कहा कि इस सौदे में शामिल प्रशासनिक अधिकारियों को पता रहा होगा कि इसराइल इस भारी पानी का इस्तेमाल परमाण बम बनाने में करेगा.

"ऐसा लगता है कि वे अधिकारी सिर्फ़ धन के लिए इच्छुक रहे होंगे."

दस्तावेज़ों से पता चलता है कि इसराइल ने जब 1961 में ब्रिटेन से और भारी पानी ख़रीदने की बात की तो तब तक उसके दिमोना परमाणु संयंत्र और संभावित परमाणु हथियार कार्यक्रम का राज़ खुल चुका था जिसे डेली एक्सप्रेस अख़बार ने खोला था.

यह राज़ खुलने के बाद विदेश मंत्रालय ने बिक्री रोक दी थी.

इसराइल ने सार्वजनिक रूप से परमाणु परीक्षण नहीं किया है और वह परमाणु हथियार होने की न तो पुष्टि करता है और न ही खंडन. इसराइल ने परमाणु अप्रसार संधि पर भी दस्तख़त नहीं किए हैं.

इसका मतलब है कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी को इसराइल के परमाणु ठिकानों का मुआयना करने का अधिकार नहीं है.

इसराइल का कहना है कि उसके इस रुख़ में तब तक कोई बदलाव नहीं आएगा जब तक उसे मध्य पूर्व में अन्य देशों से ख़तरा महसूस होगा.

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