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गुरुवार, 11 अगस्त, 2005 को 00:31 GMT तक के समाचार
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ईरान संकटः सवाल-जवाब
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ईरान ने परमाणु कार्यक्रम को रोकने के यूरोपीय संघ के प्रस्ताव को ठुकरा दिया
ईरान ने इस्फ़हान स्थित अपने परमाणु केंद्र पर फिर से काम शुरू कर दिया है.

यहाँ नवंबर 2004 में काम रोक दिया गया था और तबसे तीन यूरोपीय देश ईरान से उसके परमाणु कार्यक्रम पर बात कर रहे थे. आईए देखें कि इस संकट से जुड़े विभिन्न पहलू हैं क्या?

ईरान पर आरोप क्या लगता रहा है?

पश्चिमी देश कहते हैं कि ईरान ने पिछले 18 वर्षों से अपना यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम छिपाए रखा. पश्चिमी देश ये माँग कर सकते हैं कि चूँकि ईरान ने संयुक्त राष्ट्र की संस्था अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा आयोग को इसकी जानकारी नहीं दी इसलिए इस आधार पर उसके ख़िलाफ़ आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाएँ. पश्चिमी देश कहते हैं कि ईरान ने परमाणु अप्रसार संधि का उल्लंघन किया है.

परमाणु अप्रसार संधि है क्या?

परमाणु अप्रसार संधि 1968 में अस्तित्व में आई थी. तब पाँच परमाणु शक्तियों, अमरीका, रूस, ब्रिटेन, फ़्रांस और चीन को उनके परमाणु हथियार रखने की अनुमति तो दी गई लेकिन साथ ही ये तय हुआ कि वे ना तो ये हथियार ना ही इनकी तकनीक किसी और देश को देंगे.

इस संधि के तहत अन्य देशों को इस बात की अनुमति दी गई कि वे शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु ऊर्जा का विकास कर सकते हैं. लेकिन परमाणु ऊर्जा आयोग को इसकी निगरानी करने की अनुमति दी जाएगी.

परमाणु शक्तियों ने इस संधि के तहत अपने परमाणु हथियार त्यागने का भी वादा किया लेकिन अभी तक ये हुआ नहीं है.

अन्य परमाणु शक्तियों, जैसे, इसराइल, भारत और पाकिस्तान जैसे देशों ने परमाणु अप्रसार संधि पर दस्तख़त नहीं किए हैं और वे चाहें तो परमाणु हथियार बना सकते हैं.

वहीं उत्तर कोरिया ने संधि से ख़ुद को अलग कर लिया है और अपने पास परमाणु हथियार होने का दावा करता है.

पश्चिमी देश ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर इतना चिंतित क्यों हैं?

पश्चिमी देशों को लगता है कि ईरान गुपचुप तरीक़े से परमाणु बम बनाने की क्षमता विकसित करना चाहता है. अमरीका और कुछ और पश्चिमी देश ये कहते हैं कि ईरान पर भरोसा नहीं किया जा सकता है. उनका कहना है कि अगर ईरान को ऐसा करने दिया गया तो दूसरे देश भी ऐसा ही करना शुरू कर सकते हैं. उन्हें ये भी भय है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम से मध्य पूर्व में क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ेगी.

ईरान यूरेनियम का संवर्धन क्यों करना चाहता है?

संवर्धित यूरेनियम जो यूरेनियम की जो सर्वश्रेष्ठ किस्म है, जिसका प्रयोग परमाणु ऊर्जा केंद्रों में ईंधन के रूप में होता है. ईरान का कहना है कि वह इस प्रक्रिया को अपने ही देश में विकसित करना चाहता है क्योंकि उसे बाहर से होनेवाली आपूर्ति पर भरोसा नहीं है. उसका कहना है कि बाहर से आनेवाले यूरेनियम पर अमरीका का प्रभाव हो सकता है.

ईरान परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम क्यों चलाना चाहता है?

ईरान के पास तेल और गैस के बड़े भंडार हैं लेकिन उसका कहना है कि वह अपने यहाँ ऊर्जा की आपूर्ति में विविधता लाना चाहता है और उसे परमाणु ऊर्जा के विकास का अधिकार है. वह ये भी कहता है कि उसका असल परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम शाह के शासनकाल के दौरान ही शुरू हुआ था.

क्या ईरान परमाणु हथियार बनाना चाहता है?

ईरान कहता है कि वह यूरेनियम का संवर्धन करना चाहता है लेकिन परमाणु हथियार नहीं बनाना चाहता. लेकिन ईरान के इरादे पर संदेह करनेवाले कहते हैं कि ईरान को परमाणु ईंधन बनाने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि ये ईंधन उसे दूसरे देशों से मिल सकता है. एक और संभावना ये है कि हो सकता है कि ईरान परमाणु बम बनाने की क्षमता प्राप्त करना चाहता है, लेकिन हथियार वो भविष्य में कभी बनाएगा.

ईरान कब तक परमाणु बम बना सकता है?

विशेषज्ञों के अनुसार इसमें कई वर्ष लग सकते हैं. सबसे पहले तो ईरान को यूरेनियम के संवर्धन में अपनी श्रेष्ठता साबित करनी होगी जो आसान काम नहीं है. इसके बाद उसे ये भी सीखना होगा कि परमाणु विस्फोट किया कैसे जाए और कैसे ऐसे हथियार बनाए जाएँ जिनको विमान से या मिसाइलों से ले जाया जा सके. लेकिन इसराइल को लगता है कि ईरान एक वर्ष के भीतर ऐसी तकनीक सीख सकता है जिनसे उनका काम आगे बढ़ सकेगा.

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