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ईरान ने यूरोपीय देशों का प्रस्ताव ठुकराया | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ईरान ने परमाणु कार्यक्रम पर चल रहे विवाद को ख़त्म करने के लिए यूरोपीय प्रस्ताव को ठुकरा दिया है. अमरीका ने भी इस ताज़ा यूरोपीय प्रस्ताव का समर्थन किया है. इस प्रस्ताव में कहा गया है कि अगर ईरान यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम रोकने पर तैयार हो जाता है तो वे ईरान को असैनिक परमाणु कार्यक्रम की अनुमति दे सकते हैं. ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हामिद रज़ा आसफ़ी के हवाले से कहा गया है, "ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर यूरोपीय देशों का प्रस्ताव हमें स्वीकार नहीं. यह प्रस्ताव हमें इसलिए स्वीकार नहीं है कि इसमें यूरेनियम संवर्धन के ईरान के अधिकार को शामिल नहीं किया गया है." ईरान ने अगले सप्ताह अपना परमाणु कार्यक्रम दोबारा शुरू करने की धमकी दी है जो उसने पिछले नवंबर से स्थगित कर रखा है. ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण कार्यों के लिए है, लेकिन पश्चिमी देशों को इस पर शक है. ब्रिटेन, जर्मनी और फ़्रांस के माध्यम से यूरोपीय संघ पिछले दो सालों से समझौते की कोशिश कर रहा है. समर्थन इससे पहले अमरीकी विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी निकोलस बर्न्स ने कहा कि अमरीका को उम्मीद है कि ईरान यूरोपीय देशों के प्रस्ताव को गंभीरता से लेगा. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमरीका इन तीन यूरोपीय देशों की कोशिशों का समर्थन करता है. बीबीसी संवाददाता जोनाथन बील ने कहा है कि अमरीका का यह बयान काफ़ी महत्वपूर्ण है क्योंकि अमरीका असैनिक कार्यों के लिए भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम का विरोध करता रहा है. अभी यूरोपीय देशों का प्रस्ताव सार्वजनिक नहीं हुआ है. लेकिन इस प्रस्ताव में ईरान को यह पेशकश की गई है कि वह असैनिक उद्देश्यों के लिए परमाणु ऊर्जा का उत्पादन कर सकता है. साथ ही प्रस्ताव में यूरोपीय संघ के देशों के साथ बेहतर व्यापार संबंध की भी बात कही गई है और इसकी गारंटी दी गई है कि उसे यूरोप और रूस से वैकल्पिक परमाणु ईंधन के स्रोत मिलेंगे. बदले में यूरोपीय देश ये चाहते हैं कि ईरान यूरेनियम संवर्धन का कार्यक्रम स्थायी रूप से ख़त्म कर दे और भारी जल रिएक्टर के निर्माण की बात भी छोड़ दे. पिछले सप्ताह तेहरान ने धमकी दी थी कि वह अपने इसफ़हान परमाणु केंद्र पर फिर से काम शुरू कर देगा क्योंकि यूरोपीय देशों के साथ बातचीत में प्रगति नहीं हो पा रही है. ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी ने मंगलवार को परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) की आपात बैठक बुलाई है. माना जा रहा है कि आईएईए इस मामले को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को भेज सकता है. |
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