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परमाणु कार्यक्रम बंद करने का दबाव | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ईरान के अपना परमाणु कार्यक्रम दोबारा शुरू करने की घोषणा के एक दिन बाद उसपर इसे स्थगित करने के लिए दबाव पड़ने लगा है. अमरीका, यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र की परमाणु संस्था ने ईरान से अनुरोध किया है कि वह इस बारे में फिर से बातचीत की मेज़ पर बैठे. ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने कहा है कि वह बातचीत के लिए तैयार हैं लेकिन बातचीत नए प्रस्तावों पर होना चाहिए. अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने ईरान के रूख़ को एक सकारात्मक क़दम बताया है लेकिन उन्होंने साथ ही ये भी कहा है उन्हें अभी भी संदेह है कि ईरान परमाणु हथियार बनाना चाहता है. समझा जाता है कि ईरान को मनाने के लिए बातचीत का सिलसिला और कई दिन खिंचेगा. ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को वर्ष 2004 तक के लिए स्थगित कर दिया था लेकिन इस सोमवार उसने इस्फ़हान नामक जगह पर काम शुरू कर दिया. स्थिति ईरान ने यूरोपीय संघ के ताज़ा प्रस्ताव को ठुकराने के बाद सोमवार को परमाणु कार्यक्रम फिर शुरू कर दिया. इसके बाद अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने मंगलवार को इस बारे में आपात बैठक शुरू कर दी. ईरान के परमाणु कार्यक्रम में रूस उसका सबसे बड़ा मददगार है लेकिन उसने भी ईरान से कहा है कि वह तत्काल अपने परमाणु कार्यक्रम को बंद करे और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा आयोग के साथ सहयोग करे. वैसे आयोग की आपात बैठक से पहले इसके प्रमुख मोहम्मद अल बरदेई ने उम्मीद जताई कि स्थिति उतनी जटिल नहीं है. उन्होंने कहा,"मुझे नहीं लगता कि जो भी मुद्दे हैं उनमें से किसी का भी हल बातचीत की मेज़ से अलग कहीं और हो सकता है". अमरीका ने स्थिति पर चिंता जताई है और कहा है कि यूरोपीय संघ और ईरान के बीच बातचीत की प्रक्रिया बहाल करने के लिए वह पूरी कोशिश करेगा. फ़्रांस के विदेश मंत्री ने भी उम्मीद जताई है कि गतिरोध को बातचीत के माध्यम से सुलझाया जा सकता है. लेकिन संवाददाताओं का कहना है कि जापान, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के समर्थन वाले देश अमरीका को लगता है कि अब कूटनीतिक रास्ता बंद हो चुका है और एकमात्र रास्ता यही है कि ईरान के मसले को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सामने रखा जाए. |
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