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ब्लैकमेल कर रहे हैं जी-4 के देश: इटली | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इटली ने जी-4 के देशों पर आरोप लगाया है कि वे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए अन्य देशों को ब्लैकमेल कर रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाषण के दौरान इटली के राजदूत मार्सेलो स्पाताफ़ोरा ने यह गंभीर आरोप लगाया. जी-4 के देशों में भारत, ब्राज़ील, जर्मनी और जापान शामिल हैं. इटली के राजदूत मार्सेलो स्पाताफ़ोरा ने आरोप लगाया कि चारों देश अपने अभियान में अन्य देशों का समर्थन हासिल करने के लिए वित्तीय दबाव डाल रहे हैं. लंबे समय से इटली संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में नए सदस्यों को शामिल किए जाने का विरोध करता रहा है. इटली उस प्रस्ताव का समर्थन करता है जिसमें कहा गया है कि सुरक्षा परिषद में 10 नए सदस्य देश शामिल किए जाएँगे और इसमें बारी-बारी से 10 नए देशों को मौक़ा मिलेगा. सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए जी-4 के देशों ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रस्ताव पेश किया है जिस पर बहस जारी है. लेकिन इसे पास करने के लिए दो तिहाई सदस्य देशों का समर्थन आवश्यक है. अभियान इसके लिए जी-4 के देश पिछले कई महीनों से अभियान चला रहे हैं. सोमवार को ही लंदन में जी-4 के विदेश मंत्रियों और अफ़्रीकी संघ के बीच बातचीत हुई.
हालाँकि बातचीत में कोई ठोस सहमति नहीं हो पाई लेकिन जी-4 के देशों ने अभी उम्मीद नहीं छोड़ी है. जी-4 देशों का प्रस्ताव पास हो, इसके लिए अफ़्रीकी संघ का समर्थन मिलना काफ़ी मायने रखता है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान भी संयुक्त राष्ट्र में सुधार का समर्थन करते हैं. लेकिन उन्होंने पहली ही स्पष्ट कर दिया है कि वे सुरक्षा परिषद में नए स्थायी सदस्य देशों को वीटो का अधिकार दिए जाने के ख़िलाफ़ हैं. जी-4 के देश सुरक्षा परिषद की सदस्यता 15 से बढ़ाकर 25 करना चाहते हैं. प्रस्ताव में इस बात का भी ज़िक्र है कि छह नए सदस्य देशों को सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता दी जाए. लेकिन नई योजना के तहत स्थायी सदस्य के रूप में ब्रिटेन, चीन, रूस, फ़्रांस और अमरीका के साथ शामिल होने वाले नए देशों को 15 साल तक वीटो का अधिकार नहीं मिलेगा. |
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