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जी4 देशों ने प्रस्ताव का मसौदा सौंपा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता के लिए दावा कर रहे भारत सहित चार देशों के समूह जी4 ने सुरक्षा परिषद के विस्तार से जुड़े प्रस्ताव का मसौदा पेश कर दिया है. ये मसौदा सुरक्षा परिषद के सचिवालय को दिया गया है जहाँ प्रस्ताव का अब छह भाषाओं में अनुवाद किया जाएगा. किसी भी दस्तावेज़ को सदस्य देशों में बाँटने के लिए ये एक ज़रूरी शर्त है. भारत के अलावा जापान, ब्राज़ील और जर्मनी इस जी4 नाम से जाने जा रहे गुट के सदस्य हैं. इसके ज़रिए सुरक्षा परिषद के सदस्यों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र महासभा में रखा जाएगा. अभी सुरक्षा परिषद में पाँच स्थाई और 10 अस्थाई सदस्य हैं जबकि इस प्रस्ताव में ये संख्या बढ़ाकर 25 करने की बात कही जा रही है. बहस इनमें 11 स्थाई और 14 अस्थाई सदस्य होंगे. अब इस प्रस्ताव पर सोमवार से बहस शुरू हो सकती है. वैसे इस जी4 समूह की अभी समर्थन के मसले में अफ़्रीकी संघ से बात हो रही है और अमरीका और चीन पहले से ही किसी न किसी कारण से इस प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं. मगर इस बीच 15 कैरीबियाई देशों के समूह 'कैरीकॉम' ने इस प्रस्ताव का समर्थन करके इन देशों के अभियान को कुछ मज़बूती ज़रूर दी है. अफ्रीकी संघ में 53 सदस्य देश हैं और प्रस्ताव को आगे लाने के लिए इन देशों का समर्थन अहम माना जा रहा है. अभी तक कुछ ठोस नतीजा तो सामने नहीं आया है मगर जी4 देशों को उम्मीद है कि जल्दी ही कोई समझौता हो जाएगा. |
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