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जी8 में अफ़्रीकी सहायता का स्वागत | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अफ्रीका देशों के नेताओं ने महाद्वीप में ग़रीबी दूर करने में मदद की योजना का व्यापक स्वागत किया है. ग़ौरतलब है कि औद्योगिक रूप से सबसे ज़्यादा विकसित दुनिया के आठ देशों के नेताओं ने संयुक्त बयान में घोषणा की है कि अफ़्रीका में ग़रीबी दूर करने के लिए 50 अरब डॉलर की सहायता राशि दी जाएगी. दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति थाबो म्बेकी ने कहा कहा है कि इस योजना के तहत एक रक़म निर्धारित की गई है जिसे योजनाबद्ध तरीक़े से ऐसे कार्यक्रमों पर ख़र्च किया जाएगा जिन पर वर्षों से विचार विमर्श हो रहा है. अफ्रीकी संघ के अध्यक्ष ओलेसुगन ओबेसांजो ने कहा कि अब लग रहा है कि अफ्रीकी महाद्वीप की समस्याओं को यथार्थवादी रुख़ के साथ देखा जा रहा है. लेकिन ज़ाम्बिया के एक मंत्री फ़ेलिक्स मुताती ने कहा कि ग़रीबी उन्मूलन की इस योजना को उम्मीदों के मुताबिक़ नहीं बनाया गया. मसलन निष्पक्ष व्यापार के मुद्दे पर कोई ठोस व्यवस्था नहीं हुई क्योंकि अफ्रीका के किसान विकसित देशों के उन किसानों के मुक़ाबले कहीं नहीं ठहर सकते जिन्हें भारी सब्सिडी मिलती है. इससे पहले ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने कहा था कि जी-8 के नेता अफ़्रीकी देशों के लिए 50 अरब डॉलर की सहायता राशि देने पर सहमत हो गए हैं. ब्लेयर ने यह भी स्वीकार किया कि यह राशि उतनी नहीं है जितना सभी चाहते थे लेकिन इसे प्रगति को माना ही जाएगा. उन्होंने बताया कि जी-8 के नेता फ़लस्तीनी प्रशासन के लिए भी तीन अरब डॉलर देने पर सहमत हो गए हैं. अरब मामलों के जानकारों का कहना है कि कई अरब और मुस्लिम बहुल देशों में लोगों की नज़र इस पर थी कि जी आठ नेता इस विवादास्पद मसले के हल के लिए क्या करते हैं. इन विशेषज्ञों का कहना है कि शांति प्रक्रिया पर कोई भी फ़ैसला किए जाने के बजाय सिर्फ़ पैसे देकर जी आठ ने सबसे कम विवादास्पद फ़ैसला किया है. |
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