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अफ़्रीकी देशों का क़र्ज़ा होगा माफ़ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन के वित्त मंत्री गॉर्डन ब्राउन ने कहा है कि अमीर देशों को दुनिया के सबसे ग़रीब अफ़्रीकी देशों का कर्ज़ा पूरी तरह माफ़ कर देना चाहिए. एक नई प्रस्तावित योजना के तहत उन्होंने ये घोषणा की है और योजना को "मार्शल प्लैन फ़ॉर अफ़्रीका" का नाम दिया गया है. इसे अगले महीने स्कॉटलैंड में होने वाले जी-8 यानि आठ देशों के सम्मेलन में सहमति के लिए पेश किया जाएगा. लेकिन अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने इस योजना का ये कहते हुए विरोध किया है कि अमरीकी बजट के साथ मेल नहीं खाता. उनका कहना था, "हमारा रुख़ साफ़ है. ये प्रस्ताव हमारे बजट की ज़रूरतों के साथ मेल नहीं खाता है. लेकिन हम ब्रिटेन के साथ मिलकर दुनिया के सबसे ग़रीब अफ़्रीकी देशों से ग़रीबी उन्मूलन का काम करने के लिए तैयार हैं." योजना बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अफ़्रीका के लिए इस "मार्शल प्लैन" को पेश करते हुए ब्रितानी वित्त मंत्री गॉर्डन ब्राउन का दावा था कि इससे अफ़्रीका का नया स्वरूप सामने आएगा. दूसरे विश्व युद्ध के बाद "मार्शल प्लैन" ने यूरोप को एक बार फिर अपने पैरों पर खड़े होने में मदद की थी. प्रस्ताव के अनुसार कर्ज़ माफ़ करने के साथ-साथ इन देशों को और सहायता देने की भी बात कही गई है. इस दिशा में ब्रिटेन पहले ही क़दम उठा चुका है और पिछले हफ़्ते यूरोपीय संघ ने घोषणा की थी कि वर्ष 2010 तक वो इन देशों की दी जाने वाली राशि को दोगुना कर देगा. प्रस्ताव पर सहमति के लिए ज़रूरी होगी जी-8 देशों की मंज़ूरी और विशेष तौर पर अमरीका की मंज़ूरी. |
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