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'अफ़्रीकी देशों का पूरा कर्ज़ माफ़ हो' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
स्कॉटलैंड में दुनिया के सबसे धनी देशों के संगठन जी-8 की बैठक से पहले अफ़्रीकी देशों ने अपना कर्ज़ माफ़ करने की मांग की है. लीबिया में अफ़्रीकी संघ के देशों के सम्मेलन में नेताओं ने पिछले महीने जी-8 देशों द्वारा 40 अरब डॉलर का कर्ज़ राहत देने की घोषणा का स्वागत किया. लेकिन उन्होंने मांग की कि अफ़्रीकी देशों पर से 350 अरब डॉलर का पूरा कर्ज़ माफ़ किया जाए. अफ़्रीकी देशों के नेताओं ने विकसित दुनिया के साथ न्यायसंगत व्यापार की मांग की और कृषि सब्सिडी ख़त्म करने की अपील की. अफ़्रीकी संघ के सम्मेलन में नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में दो स्थायी सीटें अफ़्रीकी देशों को देने की भी मांग की. लेकिन सम्मेलन में यह फ़ैसला नहीं हो पाया कि कौन से दो देशों के नाम की सिफ़ारिश की जाएगी. सुशासन अफ़्रीकी संघ के अध्यक्ष और नाइजीरिया के राष्ट्रपति ओलूसेगू ओबासांजो ने कहा कि अफ़्रीकी देश पहले हुए सैनिक विद्रोह की घटनाओं को पीछे छोड़कर अब सुशासन की ओर बढ़ रहे हैं. ओबासांजो बुधवार से शुरू हो रहे जी-8 देशों के शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं. उन्होंने पश्चिमी देशों से और वित्तीय सहायता की अपील की. सम्मेलन में उन्होंने कहा, "यह बहुत ज़्यादा बात करने का समय नहीं है. यह समय है गंभीर और संगठित कार्रवाई का." ओबासांजो का बयान लीबिया के राष्ट्रपति कर्नल गद्दाफ़ी के बयान से हटकर था जिन्होंने कहा था कि अफ़्रीकी देशों को सशर्त मिलने वाली सहायता ठुकरा देनी चाहिए. गद्दाफ़ी ने कहा था कि अफ़्रीकी देश धनी देशों के दरवाज़े पर खड़े भिखारी नहीं हैं. सम्मेलन में शामिल हुए संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने कहा था कि सहायता के अलावा व्यापार के क्षेत्र में तरह-तरह की सीमाएँ और सब्सिडी को ख़त्म करने की ज़रूरत है ताकि अफ़्रीकी देश बाज़ार में प्रतियोगिता कर सकें. |
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