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मंगलवार, 28 जून, 2005 को 09:01 GMT तक के समाचार
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चीन में महिला उत्पीड़न 'अपराध'
चीन
बहुत सी महिलाएँ अपने उत्पीड़न की बात किसी से नहीं कह पाती हैं
चीन में महिलाओं के ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न अब जल्दी ही अपराध की श्रेणी में शामिल होने जा रहा है और सरकार महिला-पुरुष समानता के लिए एक नया क़ानून बनाने जा रही है.

चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार महिलाओं के अधिकारों की हिफ़ाज़त करने वाले क़ानून में प्रस्तावित संशोधन संसद में पेश किए गए हैं.

इन संशोधनों में ऐसी व्यवस्था की जा रही है जिनमें पहली बार कहा जाएगा कि महिलाओं के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करना सरकारी नीति होगी.

चीन में महिलाओं के यौन उत्पीड़न की बहुत सी शिकायतें मिलने लगी थीं और यह समस्या बहुत बढ़ती नज़र आ रही थी जिसके बाद क़ानून में ये संशोधन किए जा रहे हैं.

क़रीब आठ हज़ार महिलाओं का सर्वेक्षण किया गया जिनमें से क़रीब 79 प्रतिशत ने कभी ना कभी यौन उत्पीड़न का सामना किया था जबकि सिर्फ़ 22 प्रतिशत ऐसी समस्याओं के शिकार हुए थे.

'ख़ामोशी'

चीन की सामाजिक विज्ञान अकादमी ने एक अध्ययन में पाया है कि निजी या विदेशी कंपनियों में काम करने वाली 40 प्रतिशत महिलाओं को यौन उत्पीड़न का शिकार बनाया गया है जबकि सरकारी कंपनियों में यह प्रतिशत 18 प्रतिशत है.

विशेषज्ञों का कहना है कि बहुत सी महिलाएँ यह सबकुछ चुप रहकर सहती हैं क्योंकि देश में इस समस्या से निपटने के लिए अभी कोई क़ानून नहीं है.

शिन्हुआ समाचार एजेंसी के मुताबिक़ साल 2001 से महिला यौन उत्पीड़न के सिर्फ़ दस मामले अदालतों के सामने लाए जा सके हैं और सिर्फ़ एक मामला साबित हुआ है.

चीन में राजनीति विज्ञान और विधि विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर वू चंगज़ेन का कहना है, "महिलाधिकार संरक्षण क़ानून में नए प्रावधानों से एक ऐसी कमी पूरी होगी जिनसे महिलाओं के यौन उत्पीड़न पर रोक लगाने में मदद मिल सकेगी."

नए प्रावधानों में महिलाओं के यौन उत्पीड़न को ग़ैरक़ानूनी क़रार देने की व्यवस्था के साथ-साथ सरकारी और ग़ैरसरकारी सभी कंपनियों को हिदायत दी जा रही है कि वे ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस क़दम उठाएँ.

अलबत्ता विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि नए क़ानून का असर नज़र आने में समय लग सकता है क्योंकि अध्ययनों से पता चलता है कि महिलाएँ ऐसे मामलों में आगे आने में काफ़ी मुश्किल महसूस करती हैं.

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