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'युद्ध का ख़ामियाज़ा महिलाएँ भुगतती हैं' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अंतरराष्ट्रीय संगठन ऐमनेस्टी का कहना है कि दुनिया भर में युद्ध के दौरान महिलाएँ और लड़कियाँ बलात्कार का शिकार होती हैं और अधिकारी इसे रोकने के लिए या तो कुछ करते नहीं और या फिर करते भी हैं तो बहुत कम. अपनी एक रिपोर्ट में संगठन ने कहा है कि यह अपराध इस लिए पनप रहे हैं क्योंकि अपराधी जानते हैं कि वे सज़ा या मुक़दमा चलाए जाने से मुक्त रखे गए हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि वायदों, समझौतों और क़ानूनी प्रक्रियाओं के बावजूद सरकारें महिलाओं की सुरक्षा करने में नाकाम रही हैं. रिपोर्ट में कोलंबिया, इराक़, सूडान, चेचन्या, नेपाल और अफ़ग़ानिस्तान के विवादों का हवाला दिया गया है.
नवाधिकार गुटों का कहना है कि उनकी जाँच से पता चला है कि महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा सिर्फ़ लड़ाई का ही नतीजा नहीं होता है बल्कि अकसर सेना की एक रणनीति का हिस्सा होता है. जो किसी ख़ास समुदाय के ख़िलाफ़ केंद्रित होता है ऐमनेस्टी की महासचिव आइरीन ख़ान का कहना है कि दुश्मन को बेआबरू करने, सैनिकों का मनोबल तोड़ने और आमतौर पर लोगों को डराने के लिए महिलाओं को निशाना बनाया जाता है. उनका कहना है कि यह ज़रूरी है कि अंतरराष्ट्रीय अपराध अदालत जब अगले साल अपना कामकाज शुरू करे तो वह जिन अपराधों पर सबसे पहले मुक़दमे चलाए उनमें महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा के मामले शामिल हों. हालाँकि महासचिव ने कहा कि अदालत राजनीतिक समर्थन के बिना इंसाफ़ नहीं कर सकती और उन्होंने विश्व के नेताओं का आह्वान किया कि वे बलात्कार और यौन उत्पीड़न के ख़िलाफ़ बयान देने के अलावा और भी कुछ करें. ऐमनेस्टी अंतरराष्ट्रीय, क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और स्थानीय स्तरों पर एक एजेंडा प्रस्तुत करने जा रहा है और उसका कहना है, "हिंसा को चुनौती देने, पीड़ित महिलाओं का साथ देने और उन लोगों पर दबाव डालने के लिए जो परिवर्तन ला सकते हैं, हमें बड़े पैमाने पर सक्रियता लानी होगी". |
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