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महिलाओं पर अत्याचार सबसे बड़ी चुनौती: ऐमनेस्टी
अंतरराष्ट्रीय संस्था ऐमनेस्टी ने दुनिया भर में महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा को मानवाधिकार की सबसे बड़ी चुनौती बताया है. संस्था ने चिंता जताई है कि महिलाओं के साथ बलात्कार और उनका ख़तना किए जाने जैसे क्रूर अत्याचार बदस्तूर जारी हैं. मंगलवार को 'महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा-उन्मूलन दिवस' के मौक़े पर अफ़्रीका और अमरीका में जगह-जगह मार्च और रैलियाँ आयोजित की गई थीं. दक्षिण अफ़्रीका में सरकार ने केपटाउन में पुरुषों का आह्वान किया कि वे 'अच्छे पुरुष' मार्च में हिस्सा लें. सामाजिक विकास मंत्री ज़ोला स्क्वेयीया ने कहा, "यह समय है कि पुरुष भी आगे आएँ और महिलाओं और बच्चों के ख़िलाफ़ जघन्य हिंसा के विरुद्ध आवाज़ उठाएँ".
एक आकलन के अनुसार दक्षिण अफ़्रीका एक ऐसा देश है जहाँ दुनिया में सबसे ज़्यादा बलात्कार होते हैं- 147 प्रतिदिन. ऐमनेस्टी की रिपोर्ट में कहा गया कि हर वर्ष दुनिया भर में बारह करोड़ लड़कियाँ ख़तना की पीड़ा से गुज़रती हैं और अमरीका में ही हर साल सात लाख औरतों का बलात्कार होता है. अपनों के ही हाथों रिपोर्ट में एक तथ्य यह सामने आया है कि बहुत सी महिलाएँ अपने परिवार में ही या जानपहचान वालों के हाथों ही दुराचार का शिकार होती हैं. और इनमें समृद्ध वर्ग की महिलाएँ भी शामिल हैं. रिपोर्ट में दुनिया भर से इसकी मिसालें दी गई हैं. बांग्लादेश में जितनी महिलाओं की हत्या होती है उनमें से पचास प्रतिशत में उनके पति या साथ रह रहे प्रेमी का ही हाथ होता है. ब्रिटेन में हर मिनट घरेलू हिंसा की शिकार एक न एक महिला टेलीफ़ोन पर मदद की गुहार करती है. विश्व बैंक के एक आकलन के अनुसार हर पाँच महिलाओं या लड़कियों में से एक अपनी ज़िंदगी में कभी न कभी मारपीट या यौन उत्पीड़न का शिकार हुई है. |
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