|
'अफ़ग़ानिस्तान में महिलाएँ अब भी असुरक्षित' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान शासन के ख़ात्मे के बाद से महिलाओं की स्थिति में थोड़ा बहुत ही सुधार हुआ है. वहाँ महिलाओं के साथ बलात्कार, ज़बरदस्ती शादी और घरेलू हिंसा जैसी घटनाएँ अब भी हो रही हैं. संस्था का कहना है कि हामिद करज़ई सरकार और अंतरराष्ट्रीय समुदाय महिलाओं की सुरक्षा के थोड़े बहुत उपाय ही किए हैं. बीबीसी संवाददाता क्रिस्पिन थोरॉल्ड के अनुसार अफ़ग़ानिस्तान की कुछ महिलाओं के लिए तालेबान सरकार के पतन के बाद से पिछले दो साल में बहुत कुछ बदला है. हज़ारों लड़कियाँ अब स्कूल जा पा रही हैं और बहुत सी महिलाएँ काम पर लौटी हैं. असुरक्षा लेकिन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि आमतौर पर महिलाएँ सुरक्षित नहीं हैं. इस मानवाधिकार संगठन का कहना है कि बलात्कार का ख़तरा अभी भी बहुत अधिक है. जब अफ़गानिस्तान पर हमला किया गया था कि तालेबान का शासन ख़त्म किया जा सके तो विश्व के बहुत से नेताओं ने कहा था कि वहाँ की महिलाओं को मुक्ति मिल सकेगी. लेकिन रिपोर्ट के अनुसार बहुत सी महिलाओं के लिए दो साल बाद भी कुछ भी नहीं बदला है. यह रिपोर्ट अफ़ग़ानिस्तान में संविधान का प्रारुप आने के पहले पेश हुई है. बहुत से कार्यकर्ताओं को उम्मीद है कि नए संविधान से इस इस्लामिक देश में महिलाओं की स्थिति में फर्क़ पड़ेगा. बीबीसी संवाददाता के अनुसार लोगों की शंका यह भी है कि यदि क़ानून बदल लिया गया तो भी क्या इसे लागू किया जा सकेगा? इस समय करज़ई सरकार के नियंत्रण में राजधानी काबुल से बाहर कम ही क्षेत्र है और ज़्यादातर जगह अब भी अराजकता है. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||