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स्कूल में दुर्व्यवहार की तस्वीरें बाँटीं थीं | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जर्मनी में 11 ऐसे किशोरों पर मंगलवार को मुक़दमा शुरू हो रहा है जिन पर आरोप है कि उन्होंने अपने ही साथी 18 वर्ष के एक छात्र को स्कूल में प्रताड़ित किया. ये सारे ही किशोर 16 से 18 वर्ष की उम्र के हैं और अगर ये दोषी पाए जाते हैं तो इन्हें छह साल की क़ैद की सज़ा तक हो सकती है. बीबीसी संवाददाता त्रिष्टाना मूर का कहना है कि यह एक ऐसा मामला रहा है जिसने जर्मनी को हिलाकर रख दिया था. इस साल फ़रवरी में देश के अख़बारों में यह ख़बर सुर्ख़ियों में छपी थीं कि इन किशोरों ने स्कूल में ही एक अन्य किशोर को किस तरह प्रताड़ित किया. और यह सिलसिला हिल्डेशीम के उस स्कूल में कुछ दिन नहीं बल्कि चार महीने तक बिना रोकटोक चला. उस दौरान इन किशोरों ने 18 साल के उस छात्र को मारा पीटा और उसके साथ बहुत बुरा बर्ताव किया. अभियोग पक्ष का कहना है कि उन किशोरों ने उस छात्र साथ यौन बदतमीज़ियाँ भी कीं और उसे सफ़ाई करने वाले ब्रश से अपने दाँत साफ़ करने के लिए मजबूर किया. इतना ही नहीं, इन किशोरों ने स्कूल के पढ़ाई वाले कमरे और गोदाम में की गई अपनी इन करतूतों की एक वीडियो फ़िल्म भी बनाई. उनमें से कुछ तस्वीरें इंटरनेट पर भी बाँटी गईं. अब इन किशोरों पर हिल्डेशीम की एक विशेष युवा अदालत में मुक़दमा हुआ है और इन पर विभिन्न आरोप लगाए गए हैं. अगर वे दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें छह साल तक की क़ैद हो सकती है. जानकारों का कहना है कि इनमें से ज़्यादातर किशोर आप्रवासी परिवारों से हैं और उनमें भी अनेक पूर्व सोवियत संघ के गणराज्यों से हैं. वे कहते हैं कि जर्मनी के स्कूलों में इस तरह की ज़्यादातर हिंसा आप्रवासी परिवारों के बच्चे ही करते हैं. 18 साल का वह छात्र अदालत में अपना बयान देगा या नहीं, इस बारे में अदालत ही फ़ैसला करेगी. |
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