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'क़ुरान के अपमान' के आरोपों की जाँच | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी रक्षा विभाग सैनिक अड्डे ग्वांतानामो बे में मुसलमान क़ैदियों से पूछताछ के दौरान मुसलमानों के पवित्र ग्रंथ क़ुरान का अपमान किए जाने के मामले की जाँच करवाएगा. अमरीकी सैनिक अड्डे ग्वांतानामो बे में मुसलमानों के पवित्र ग्रंथ क़ुरान को अपवित्र किए जाने की ख़बरों के बाद अफ़ग़ानिस्तान के जलालाबाद नगर में प्रदर्शन हुए. पुलिस ने उग्र भीड़ पर गोली चलाई जिससे कई लोग घायल हो गए. सैकड़ों छात्रों ने 'क़ुरान के अपमान' की ख़बरों के बाद हुए प्रदर्शन के दौरान कारों के शीशे तोड़ दिए और अमरीका विरोधी नारे लगाए. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि क़ैदियों के साथ दुर्व्यवहार का कोई भी आरोप निश्चित रूप से राष्ट्रपति बुश के प्रशासन को काफ़ी चिंतित करेगा. चाहे ताज़ा दावे साबित नहीं हुए हैं मगर इनसे बुश प्रशासन की कोशिशों को काफ़ी ज़बरदस्त धक्का लगा है जिनके तहत वो अपनी छवि सुधारने की कोशिश में लगा है. अमरीकी पत्रिका 'न्यूज़वीक' में ख़बर छपी थी कि ग्वांतानामो बे में मुसलमान क़ैदियों से जानकारियाँ हासिल के दौरान पूछताछ करने वालों ने पवित्र ग्रंथ क़ुरान को क़ैदियों के शौचालयों में रखा. पेंटागन के एक प्रवक्ता ने बताया है कि इन आरोपों की अब जाँच हो रही है मगर उसका दावा है कि क़ैदियों की सांस्कृतिक और धार्मिक मान्यताओं का पूरी तरह सम्मान किया जा रहा है. अमरीकी रक्षा मंत्रालय के अनुसार क़ैदियों को प्रार्थना-आराधना का अधिकार है, वे क़ुरान पढ़ सकते हैं और उनके खान-पान पर भी ध्यान दिया जाता है. पेंटागन का कहना है कि ग्वांतानामो बे में तैनात अमरीकी सैनिकों को प्रशिक्षित किया गया है जिससे वे बंधकों के अधिकारों और उनके सम्मान को बचाए रखें. ग्वांतानामो बे में अब भी लगभग 500 बंदी हैं जिन्हें अमरीका ने 11 सितंबर 2001 में अमरीका पर हुए हमले के बाद से अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान से बंदी बनाया था. |
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