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मंगलवार, 12 अक्तूबर, 2004 को 04:27 GMT तक के समाचार
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कुछ बंदी ग़ायब हो रहे हैं:रिपोर्ट
ग्वांतनामो बे शिविर में रखे गए बंदी
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा है कि अमरीकी में अल क़ायदा से संबंधों के संदेह में हिरासत में रखे गए बहुत से बंदी ग़ायब हो गए हैं.

संगठन की हाल ही में प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि अमरीका की हिरासत में कुछ बंदियों को कथित तौर पर प्रताड़ित किया गया.

न्यूयॉर्क में बीबीसी संवाददाता जेरेमी कुक का कहना है कि ह्यूमन राइट्स वॉच ने यह तो कहा है कि उसके पास अपनी बात के समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं है लेकिन संगठन ने अपनी रिपोर्ट तैयार करने में मीडिया की ख़बरों सहित अनेक स्रोतों का इस्तेमाल किया है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि यह रिपोर्ट एक तरह से अल क़ायदा संदिग्धों के साथ अमरीकी व्यवहार के बारे में अभियोग पत्र है.

रिपोर्ट में ऐसे 11 बंदियों का हवाला दिया गया है जो अमरीकी हिरासत से ग़ायब हो गए हैं उन्हें अमरीका से बाहर कहीं गुप्त स्थान पर रखा गया है.

संगठन का कहना है कि गुप्त स्थान पर रखे गए उन बंदियों तक न तो अंतरराष्ट्रीय रेडक्रॉस की पहुँच है और न ही उन्हें अंतरराष्ट्रीय क़ानून का संरक्षण हासिल है.

ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि इस तरह छुपाकर रखे गए संदिग्धों में एक ख़ालिद मोहम्मद शेख़ भी शामिल हैं जिन पर 11 सितंबर 2001 के हमलों की योजना बनाने वाला मुख्य व्यक्ति होने का आरोप लगाया जाता है.

संगठन की रिपोर्ट में कहा गया है कि हो सकता है कि ख़ालिद शेख़ मोहम्मद को हिरासत में प्रताड़ित किया गया हो.

इस रिपोर्ट पर अमरीकी राष्ट्रपति कार्यालय व्हाइट हाउस की अभी कोई प्रतिक्रिया तो नहीं आई है लेकिन अमरीकी अधिकारियों ने इससे पहले कहा है कि बंदी बनाकर रखे गए बहुत से संदिग्धों ने पूछताछ के दौरान ऐसी महत्वपूर्ण सुचनाएँ मुहैया कराईं जिनसे संभावित चरमपंथी हमले रोकने में मदद मिली है.

हालाँकि ह्यूमन राइट्स वॉच की रिपोर्ट इस पर सवाल खड़े करते हुए कहती है कि ऐसी ख़बरें मिली हैं कि बंदियों ने प्रताड़ना से बचने और पूछताछ करने वालों को संतुष्ट करने के इरादे से जानबूझकर झूठ बोला है.

ह्यूमन राइट्स वॉच के विशेष वकील रीड ब्रॉडी ने अपनी भावनाओं का साराँश यह कहते हुए पेश किया है, "जो लोग गंभीर अपराधों के दोषी हैं उन्हें न्याय के कटघरे में खड़ा किया जाना चाहिए."

रिपोर्ट में उन्होंने कहा है, "अगर अमरीका अपने विरोधियों की प्रताड़ना और उन्हें ग़ायब करने का रास्ता चुनता है तो वह अपने आदर्शों को त्याग रहा है और कम महत्वपूर्ण राष्ट्र बन रहा है."

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