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बंदियों को देखना चाहता है संयुक्त राष्ट्र | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने कहा है कि वे ख़ुद जाकर इराक़, अफ़ग़ानिस्तान और ग्वांतानामो बे में क़ैदियों की हालत देखना चाहते हैं. संयुक्त राष्ट्र के 31 विशेषज्ञों ने संयुक्त रुप से बयान जारी कर कहा है कि अमरीका ने चरमपंथ के ख़िलाफ़ जो क़दम उठाए हैं उनका दुनिया भर में जो असर हुआ है और उससे वे चिंतित हैं. इन विशेषज्ञों का बयान अबू ग़रेब में क़ैदियों के साथ दुर्व्यवहार की ख़बरों को लेकर दुनिया भर में मचे बवाल के बाद आया है. ब्रिटेन के एटॉर्नी जनरल लॉर्ड गोल्डस्मिथ का कहना है कि ग्वांतानामो बे के क़ैदियों के लिए स्थापित सैन्य ट्रिब्यूनल अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरुप नहीं हैं. उन्होंने कहा है कि क्यूबा के ग्वांतानामो बे में क़ैद अलक़ायदा और तालेबान के कार्यकर्ताओं के लिए तो क़ानूनी सीमाओं को स्वीकार किया जा सकता है. लेकिन उनका कहना है कि वहाँ के क़ैदियों को, जिसमें ब्रिटेन के क़ैदी भी शामिल हैं, निष्पक्ष मुक़दमे जैसे अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता. उधर अमरीकी अधिकारियों ने बीबीसी से कहा है कि अमरीका ने जो सैन्य आयोग बनाए हैं जब वे काम करने लगेंगे तो लोगों की शिकायत दूर हो जाएगी. संवाददाताओं का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों के इस पत्र से अमरीका पर दबाव बढ़ेगा कि वह क़ैदियों के साथ ज़्यादा ऐहतियात के साथ पेश आए. बीबीसी के संवाददाता इमोजेन फॉल्क्स का कहना है कि इस बात की संभावना कम ही है कि संयुक्त राष्ट्र को अमरीका से जल्दी ही कोई प्रतिक्रिया मिलेगी. विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के दिनों में जो घटनाएँ घटी हैं उसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय क़ैदियों की हालात को लेकर चिंतित है. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इसका संकेत अबूग़रेब में क़ैदियों के साथ दुर्व्यवहार की ओर था. उन्होंने कहा है कि विशेषज्ञों की टीम क़ैदियों की हालत इसलिए देखना चाहते हैं ताकि वे अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के अनुरुप रखे जाएँ. |
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