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पिटाई की जाती थी:ग्वांतानामो कैदी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ग्वांतानामो बे जेल से रिहा किए गए ब्रिटिश नागरिक मार्टिन मुबांगा का कहना है कि उन्हें उस जेल में बुरी तरह प्रताड़ित किया गया था. मुबांगा को 33 महीने ग्वांतानामो बे जेल में रखा गया. जनवरी माह के अंत में तीन अन्य ब्रिटिश नागरिकों के साथ रिहा किया गया और वो लंदन पहुंचे. इन सभी लोगों से ब्रिटेन की पुलिस ने पूछताछ की और एक ही दिन में बिना कोई आरोप लगाए उन्हें छोड़ भी दिया गया. अब इनमें से एक व्यक्ति ने पहली बार आब्जर्वर अख़बार को इंटरव्यू देकर बताया है कि ग्वांतानामो बे में उन्हें कैसे रखा जाता था. 32 वर्षीय मुबांगा ने बताया कि वह सन् 2000 में इस्लाम और अरबी भाषा की पढ़ाई करने अफगानिस्तान गए थे लेकिन तालिबान के ख़िलाफ अमरीकी हमलों के शुरु होते ही वह ज़ांबिया चले गए. मुबांगा ज़ांबिया में ही पैदा हुए थे. ज़ांबिया में ही मुबांगा को गिरफ्तार किया गया और वहीं अमरीकी और ब्रिटिश गुप्तचर अधिकारियों ने उनसे पूछताछ की. पूछताछ के बाद उन्हें क्यूबा के कैंप डेल्टा शिविर में भेज दिया गया. मुबांगा का कहना था कि उन्हें कई कई घंटों तक हाथों में हथकड़ी पहना कर अकेले कालकोठरी में छोड़ दिया जाता था. मुबांगा ने आरोप लगाया कि उनके अत्यंत बुरा बर्ताव किया जाता था और एक सैनिक अक्सर उन्हे भद्दी गालियां देता था और चेहरे पर पेशाब कर दिया करता था. उन्होंने बताया कि एक बार पूछताछ के दौरान एक अधिकारी को जब उनपर गुस्सा आया तो उनके बाल बुरी तरह खींचे गए. ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय ने इन आरोपों पर कोई टिप्पणी नहीं की है. लेकिन अमरीकी रक्षा विभाग का कहना है कि मुबांगा के साथ कोई ज़्यादती नहीं की गई बल्कि वैसा ही बर्ताव किया गया जैसा दुश्मन सैनिकों के साथ किया जाता है. रक्षा विभाग का कहना है कि अमरीका की नीति प्रताड़ना देने की नहीं है और वो ऐसे किसी भी कदम की निंदा करते हैं. अब मुबांगा ब्रिटेन में हैं और अपने जेल के दिनों के बारे में एक संगीत अलबम निकालने की योजना बना रहे हैं. |
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