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ग्वांतनामो के बंदियों को क़ानूनी अधिकार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका की एक संघीय जज ने क्यूबा के ग्वांतनामो बे में अमरीकी नौसैनिक अड्डे पर रखे गए सैकड़ों बंदियों पर मुक़दमा चलाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे विशेष सैन्य ट्राइब्यूनलों को ग़ैरक़ानूनी क़रार दिया है. जज जायस हेंस ग्रीन ने कहा है कि ये ट्राइब्यूनल ग्वांतनामो बे शिविर के बंदियों को अमरीकी संविधान के तहत दिए गए अधिकारों से वंचित करते हैं. जज ग्रीन के इस फ़ैसले को बुश प्रशासन के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है. बुश प्रशासन कहता रहा है कि ग्वांतनामो बे शिविर में रखे गए बंदियों को कोई संवैधानिक अधिकार हासिल नहीं हैं. लेकिन एक बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ऐसी कम ही संभावना है कि जज के इस फ़ैसले के साथ ही यह मामला यहीं ख़त्म हो जाए. मूलाधिकार जज ग्रीन ने कहा कि उन्होंने 11 मामलों में ट्राइब्यूनलों की जाँच की तो उन्हें असंवैधानिक पाया और बंदियों के साथ पूरी क़ानूनी प्रक्रिया नहीं अपनाई गई. जज ने इन आरोपों पर भी ध्यान दिया कि ग्वांतनामो बे शिविर में बंदियों के साथ बड़े पैमाने पर दुर्व्यवहार किया गया और कहा कि ऐसी हालत में दिए गए बंदियों के बयानों की वास्तविकता पर भी सवाल उठते हैं. जज ग्रीन ने कहा, "आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई एक ऐसे देश में लोगों के मूलाधिकारों के वजूद को नहीं नकार सकती जिसके लिए 200 से ज़्यादा साल तक संघर्ष किया गया." वाशिंगटन में बीबीसी संवाददाता एडम ब्रुक्स का कहना है जज का यह फ़ैसला बुश प्रशासन की इस दलील को एक प्रभावशाली चुनौती है कि सरकार को ऐसे किसी भी व्यक्ति को अनिश्चितकाल के लिए बंदी रखने का अधिकार है जिसे 'संदिग्ध आतंकवादी' समझा जाए. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इस मामले में अनेक विरोधाभासी फैसलों के बाद अब संभव है कि कोई उच्च अदालत इस बारे में कोई अंतिम फ़ैसला दे. |
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