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'क़ुरान के अपमान' की ख़बरों से दंगा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी सैनिक अड्डे ग्वांतानामो बे में मुसलमानों की पवित्र किताब क़ुरान को अपवित्र किए जाने की ख़बरों के बाद अफ़ग़ानिस्तान के शहर जलालाबाद में उग्र प्रदर्शन हुए हैं. पुलिस को इसे नियंत्रित करने के लिए गोली चलानी पड़ी है जिससे कम से कम 12 लोग घायल हो गए. सैकड़ों छात्रों ने 'क़ुरान के अपमान' की ख़बरों के बाद उग्र प्रदर्शन किया और उन्होंने कारों के शीशे तोड़ दिए और अमरीका विरोधी नारे लगाए. समाचार एजेंसी एएफ़पी ने अपुष्ट ख़बर दी है कि गोलीबारी में 47 लोग घायल हो गए हैं और एक की मौत हो गई है. अमरीकी अधिकारियों ने कहा है कि वे इन ख़बरों की जाँच कर रहे हैं कि सैनिकों ने ग्वांतनामो बे शिविर में क़ुरान का अपमान किया है. अमरीकी पत्रिका न्यूज़वीक ने पिछले सप्ताह एक रिपोर्ट में लिखा था कि अमरीकी सैनिक अड्डे ग्वांतानामो बे में मुसलमानों की पवित्र किताब क़ुरान को अपवित्र किया गया है. पत्रिका के अनुसार ग्वांतानामो बे अड्डे में बंदियों से जानकारियाँ हासिल करने के लिए ऐसे तरीक़ों का इस्तेमाल किया गया है. अमरीकी विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि अगर ये आरोप सही हैं तो सैनिकों ने अमरीकी नीति का निंदनीय उल्लंघन किया है. न्यूज़वीक ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि एक मौक़े पर क़ुरान की एक प्रति को फाड़कर टॉयलेट में डाल दिया गया कम से कम एक मामले में तो क़ुरान के पन्नों को शौचालय के पानी में बहा दिया गया. पाकिस्तान सरकार ने इन ख़बरों पर गंभीर चिंता प्रकट करते हुए कहा था कि बंदियों के साथ यह बहुत आपत्तिजनक बर्ताव है. इन ख़बरों के बाद अफ़ग़ानिस्तान में दो हज़ार से ज़्यादा लोगों ने प्रदर्शन किया था राजधानी काबुल से जलालाबाद जाने वाला मार्ग घंटों तक बंद रखा था. अमरीका ने ग्वांतानामो बे में अपने सैनिक अड्डे में 520 लोगों को बंदी बनाकर रखा हुआ है. इनमें से अधिकतर लोगों को 11 सितंबर 2001 के हमले के बाद अल क़ायदा और तालेबान से संबंधित होने के संदेह में पकड़ा गया था. |
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