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क्यों नहीं आई सूनामी लहरें | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सोमवार को इंडोनेशिया में ज़बर्दस्त भूकंप आया और इसके बाद तुरंत सूनामी लहरों की चेतावनी जारी की गई लेकिन सौभाग्यवश सूनामी लहरें नहीं आई. सूनामी लहरें नहीं आने से निश्चित रुप से कम तबाही हुई लेकिन अभी भी इसमें सैकड़ों लोगों के मरने की ख़बर हैं. रिक्टर पैमाने पर जब भी भूकंप की तीव्रता छह से अधिक होती है तो उसे ख़तरनाक माना जाता है ऐसे में सोमवार को इंडोनेशिया में आया भूकंप बहुत ही ख़तरनाक था क्योंकि इसकी तीव्रता 8.7 थी. 1990 के बाद आए तेज़ भूकंपों में यह आठवें स्थान पर है. लेकिन ये झटके दिसंबर महीने में आए भूकंप से दस से बीस गुना कम तीव्र थे. दिसंबर में आए भूकंप की तीव्रता नौ थी. लॉगरिथमिक स्केल के अनुसार रिक्टर स्केल पर 8.7 से 9 का अंतर दस से बीस गुना कम है. इसी महीने शोधकर्ताओं ने चेतावनी थी इन भूकंपों की. तीन महीने पहले आए भूकंप में सुमात्रा द्वीप के नीचे ज़मीन की प्लेंटें थोड़ी खिसक गई थी. सोमवार को भी यहीं हलचल हुई और झटके आए. सोमवार को चूंकि प्लेटों की पूरी हलचल ज़मीन के काफी नीचे हुई और चूंकि प्लेंटें समानांतर हिलीं इसलिए सूनामी लहरें नहीं उठीं. लेकिन अगर ये हलचल समुद्र तट तक आतीं या प्लेंटें समानांतर की बजाय अगर ऊपर नीचे हिलती तो सूनामी लहरें उठती क्योंकि प्लेंटों के ऊपर नीचे होने से पानी पर दबाव बहुत अधिक बढ़ जाता है. सुमात्रा द्वीप के नीचे प्लेटों को सबसे पहले 1861 में नुकसान पहुंचा था और तब से यह ज़ोन ख़तरनाक माना जाता है. आशंका थी कि इस इलाक़े में भूकंप आया तो सूनामी लहरें भी आएंगी. सूनामी लहरों के बारे में वैज्ञानिक समझ को और आगे बढ़ाने की बड़ी चुनौती है. अभी भी वैज्ञानिकों को एक और बड़ी चिंता हैं क्योंकि सुमात्रा द्वीप के बीचोबीच एक और प्लेट क्षतिग्रस्त है जिस पर दिसंबर की सूनामी लहरों का बुरा असर पड़ा है. अब इस नए भूकंप का इन प्लेटों पर क्या असर हुआ है यह आने वाले दिनों में शोध से पता चल सकेगा. |
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