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सूनामी से महिलाएँ अधिक मरीं- रिपोर्ट | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अंतरराष्ट्रीय सहायता संस्था ऑक्सफ़ैम ने कहा है कि पिछले वर्ष के अंत में आई सूनामी लहरों के प्रकोप में पुरूषों की अपेक्षा महिलाएँ अधिक मारी गईं. संस्था ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि विशेष रूप से भारत, श्रीलंका और इंडोनेशिया में महिलाओं को अधिक नुक़सान उठाना पड़ा. संस्था कहती है कि कुछ क्षेत्रों में तो पुरूषों की तुलना में मरनेवाली महिलाओं की संख्या चार गुना अधिक रही. इस बारे में कारण बताते हुए संस्था कहती है कि महिलाएँ अधिक प्रभावित इसलिए हुईं क्योंकि वे या तो समुद्रतट पर मछुआरों की वापसी के लिए इंतज़ार कर रही थीं या घर संभाल रही थीं. ऑक्सफ़ैम इंटरनेशन ने अपने अध्ययन के लिए इंडोनेशिया के आचे प्रांत, भारत के कुड्डलोर ज़िले और श्रीलंका के विभिन्न शिविरों से आँकड़े लिए. असमानता रिपोर्ट के अनुसार अकेले आचे बेसार के चार गाँवों में जो 676 लोग जीवित बचे हैं उनमें केवल 189 महिलाएँ हैं. इसी तरह उत्तरी आचे ज़िले के चार गाँवों में जहाँ 82 पुरूष मरे वहीं महिला मृतकों की संख्या 284 रही. वहीं भारत में तमिलनाडु के कुड्डलोर ज़िले के एक गाँव पचानकुप्पम में मरनेवाली सभी महिलाएँ थीं. ऑक्सफ़ैम की एक अधिकारी बेकी बुएल बताती हैं,"ये जो विषमता है उससे आनेवाले समय में कई समस्याएँ सामने आ सकती हैं अगर उनपर अभी ध्यान नहीं दिया गया". उन्होंने कहा कि अभी से ही इन क्षेत्रों में बलात्कार और जबरन विवाह जैसी ख़बरें आनी शुरू हो गई हैं. उन्होंने सूनामी से बची हुई महिलाओं को सुरक्षा देने के लिए सभी लोगों से आगे आने का आग्रह किया. |
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