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डच व्यवसायी पर 'नरसंहार' का मुक़दमा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को ज़हरीली गैस बनाने के लिए रसायन बेचने के अभियुक्त एक डच व्यवसायी पर आज यानी शुक्रवार को रोत्रेदम में मुक़दमा शुरू हो रहा है. फ्रांस वैन अनरात नाम के इस व्यवसायी पर युद्धापराध और नरसंहार का आरोप है. ऐसा पहली बार हो रहा है कि किसी डच व्यवसायी को इस तरह के आरोपों का सामना करना पड़ रहा है. वैन अनरात पर आरोप है कि उन्होंने अमरीका और जापान से कुछ ऐसे रसायन सद्दाम हुसैन को बेचे जिनसे बेहद ख़तरनाक ज़हरीली गैसें बनाई जा सकती हैं. कहा जाता है कि इन गैसों का इस्तेमाल 1988 में कुर्द शहर हलाब्जा पर हमले के दौरान किया गया था जहाँ पाँच हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई थी. इस मुक़दमें में सद्दाम हुसैन के ज़माने में देश के परमाणु हथियार कार्यक्रम के मुखिया अली हसन अल माजिद उर्फ़ कैमिकल अली से प्राप्त सूचनाओं को भी सबूत के तौर पर पेश किया जा रहा है. अली हसन अल माजिद पर आरोप है कि उन्होंने हलाब्जा पर ज़हरीली गैस के हमले की योजना बनाई थी. अमरीका ने वैन अरनात के ख़िलाफ़ निर्यात नियम तोड़ने के मामले में गिरफ़्तारी वारंट जारी किए थे. साल 2003 में इराक़ पर हमले के वक़्त अरनात इराक़ में ही थे और वहाँ पिछले दस साल से रह रहे थे. ख़बरों में कहा गया है कि उस दौरान अरनात ने सद्दाम हुसैन के हथियार कार्यक्रम के बारे में डच ख़ुफ़िया एजेंसी को सूचनाएँ दी थीं. |
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