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सरकार के बिना इराक़ी संसद का पहला सत्र | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ की नई संसद बुधवार को अपनी उदघाटन बैठक कर रही है. लेकिन देश के मुख्य राजनीतिक गुटों के बीच गठजोड़ सरकार के स्वरूप पर अब तक सहमति नहीं बन पाई है. बग़दाद से बीबीसी संवाददाता के अनुसार इराक़ में नई सरकार के गठन के लिए बातचीत की जटिल प्रक्रिया से जुड़े वार्ताकारों ने आगाह किया है कि अंतिम क्षणों में किसी चमत्कार की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए. ऐसी आशा की जा रही थी कि संसद की बैठक से पहले विभिन्न पक्षों के बीच सत्ता की साझेदारी का कोई फ़ार्मूला निकल आएगा और संसद आमसहमति से राष्ट्रपति और दो उपराष्ट्रपतियों की नियुक्ति कर सकेगी. ऐसा होने के बाद प्रधानमंत्री पद के लिए किसी नाम पर सहमति बनाई जाती और सरकार का काम औपचारिक रूप से शुरू हो पाता. प्रतीकात्मक लेकिन वार्ताकारों का कहना है कि ये सब हो नहीं पाया, इसलिए संसद की बैठक का प्रतीकात्मक महत्व भर होगा. बैठक में निवर्तमान अंतरिम राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के भाषण होंगे. साथ ही निर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाई जाएगी. लेकिन नवनिर्वाचित सांसद, सदन के सभापति का चुनाव करने की स्थिति में भी नहीं होंगे. दरअसल शिया और कुर्द धड़ों के बीच इसके लिए बातचीत अब भी जारी है. उल्लेखनीय है कि ये दो धड़े सदन में दो तिहाई बहुमत का प्रतिनिधित्व करते हैं. हालांकि दोनों पक्ष संभावित गठजोड़ को लेकर शीघ्र सहमति बनने की बात कर रहे हैं, लेकिन सरकार के गठन में अभी और समय लगेगा. वार्ताकारों का मानना है कि सरकार के प्रारूप पर सहमति बनने में अभी कुछ और दिन लगेंगे, लेकिन उन्हें इस महीने के अंत तक सरकार के गठन का भरोसा है. |
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